गोरखपुर में अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा )साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जाल में उलझाकर नकदी निकालने और फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश तक पहुंचाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का गोरखपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 13 लाख 76 हजार 700 रुपये नकद, 22 एटीएम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक, फर्जी मुहर, कैश काउंटिंग मशीन, नेपाली मुद्रा, चार पहिया वाहन और मोटरसाइकिल बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में 34 म्यूल बैंक खातों से जुड़े मामलों में 4 करोड़ 9 लाख 11 हजार 738 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में पुलिस अधीक्षक अपराध अयोध्या प्रसाद सिंह और सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी कैंट एवं अपराध अरुणकुमार सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह साइबर ठगी और ऑनलाइन निवेश ट्रेडिंग के नाम पर धोखाधड़ी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में मंगाता था। इसके बाद एटीएम कार्ड और चेक के माध्यम से नकदी निकाली जाती थी। कमीशन काटने के बाद शेष रकम को विदेशी एजेंटों के जरिए यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर निर्धारित डिजिटल वॉलेट पर भेज दिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महराजगंज जिले के नौतनवा थाना क्षेत्र स्थित वार्ड नंबर 14, गौतम बुद्ध नगर निवासी नवनीत पाण्डेय उर्फ आदेश पाण्डेय, चंदौली निवासी आदर्श सिंह उर्फ थायनोस, गोरखपुर के राजघाट थाना क्षेत्र स्थित बसंतपुर रैन बसेरा के पीछे रहने वाले रवि वर्मा, एम्स थाना क्षेत्र के कूड़ाघाट स्थित आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रज्ञा रतन और चिलुआताल थाना क्षेत्र के करीमनगर निवासी मकसूद आलम खान के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य लोगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कमीशन का लालच देते थे। इसके बाद खाताधारकों की पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में लेकर खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि मंगाने के लिए किया जाता था। खातों में रकम पहुंचते ही नकदी निकालने और उसे आगे भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग सदस्यों की भूमिका तय थी। कोई खाते उपलब्ध कराने और नकदी निकलवाने का काम करता था तो कोई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाकर डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाता था।
प्रारंभिक जांच में 34 म्यूल बैंक खातों से संबंधित 4,09,11,738 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। ये शिकायतें बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कितनी रकम का वास्तविक लेन-देन हुआ, किन लोगों ने जानबूझकर खाते उपलब्ध कराए और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 22 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, तीन पासबुक, दो फर्जी मुहर, 13 लाख 76 हजार 700 रुपये नकद, 4,710 रुपये नेपाली मुद्रा, एक कैश काउंटिंग मशीन, एक चार पहिया वाहन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामदगी के आधार पर चिलुआताल थाने में मुकदमा अपराध संख्या 792/2026 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 317(4), 317(5), 338 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई की गई है।
मामले में कृष्णा शर्मा निवासी सूरजकुंड, थाना तिवारीपुर, दिव्यांशु शेखर शुक्ल निवासी बशारतपुर, थाना शाहपुर, आदर्श द्विवेदी, विदित और गोविंद वर्मा को वांछित बताया गया है। पुलिस इनके साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेशी एजेंटों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल जांच जारी है और रकम के वास्तविक स्रोत तथा उसके अंतिम गंतव्य का पता लगाया जा रहा है।
गिरफ्तार में प्रभारी निरीक्षक साजिद अली खान टिम चिलुआताल थानाध्यक्ष सूरज सिंह की टिम उप निरीक्षक उपेंद्र सिंह की टिम शशिकांत जायसवाल अन्य मौजूद रहे।