
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार सामने आ रही दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
आराधना मिश्रा ने रविवार को जारी बयान में दावा किया कि बीते एक सप्ताह के दौरान बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशाम्बी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और लखनऊ समेत कई जिलों से नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने सोनभद्र की 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की प्रसव के दौरान मौत का उल्लेख करते हुए इसे बेहद चिंताजनक घटना बताया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ललितपुर में पांच वर्षीय बच्ची और प्रयागराज में 10 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म के आरोपों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि मामला केवल अलग-अलग आपराधिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधों पर नियंत्रण की व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
आराधना मिश्रा ने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एक वर्ष के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के 66,381 मामले दर्ज हुए। उनके मुताबिक यह आंकड़ा प्रतिदिन औसतन करीब 182 मामलों के बराबर है। उन्होंने इसी अवधि में दुष्कर्म के 3,516 और हत्या के 3,206 मामले दर्ज होने का भी दावा किया।
उन्होंने हाल में उच्चतम न्यायालय की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की नाराजगी के बावजूद सरकार की कार्यप्रणाली में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जब स्कूल से घर लौटने वाली बच्चियां और पांच-दस साल की मासूम बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए क्या प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि बेटियां भय के माहौल में नहीं, बल्कि सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ जीवन जीना चाहती हैं।
आराधना मिश्रा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा केवल राजनीतिक दावा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार बेटियों को स्कूल, सड़क और घर तक सुरक्षित माहौल उपलब्ध नहीं करा पाती, तो जनता इसका जवाब चुनाव में देगी।
