48घंटे मे बाढ़ पीड़ितों के लिए सारी मांगे पूरी नहीं की जाती है तो आमरण अनशन होगा – रविप्रताप सिंह

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
गुरुवार को कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओ एवं ग्रामीणों के साथ बरहज तहसील पहुंच कर बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिलाने की उपजिलाधिकारी से वार्ता कर मांग की।
बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित क्षेत्र परसिया देवार एवं विशुनपुर देवार के बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओ एवं ग्रामीणों संग बरहज तहसील पहुँच कर उपजिलाधिकारी प्रवीण कुमार से वार्ता की। उन्होंने कहा कि, सरयू व घाघरा नदी के जल स्तर मे लगातार वृद्धि के कारण परसिया देवार एवं विशुनपुर देवार के ग्रामवासी डरे सहमे राते काट रहे है, वही विशुनपुर देवार के सभी टोले टापू बन गए है और वहाँ के लोग जाग कर रात काटने पर मजबूर है। रविप्रताप सिंह ने बताया कि ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा अभी तक एक छोटी नाव के सिवा कोई व्यवस्था नहीं मुहैया कराई गईं है।
वार्ता कर समस्या से अवगत कराते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया है। उन्होंने मांग किया कि ग्रामीणों के लिए राहत सामग्री, पर्याप्त मात्रा मे नाव, लाइफ जैकेट, एवं पीड़ितों के लिए एम्बुलेंस व स्वास्थ्यकर्मी तथा पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन 48 घंटे मे सारी व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराता है तो हम सभी कार्यकर्त्ता एवं ग्रामीण आमरण अनशन करने पर मजबूर होंगे। इसी क्रम मे कांग्रेसियों ने कांग्रेस प्रवक्ता के साथ अंतिम संस्कार करने को मजबूर लोगो कि सुरक्षा को लेकर उपजिलाधिकारी से वार्ता की, उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार करने आये लोगो को राम जानकी मार्ग पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है जो कभी भी दुर्घटना का सबब बन सकता है। इस लिए उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। इस पर उपजिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था, घाट पर पर्याप्त मात्रा मे लकड़ी तथा बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री एवं स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान एस के दीक्षित, बलराम यादव, अशोक यादव, कृष्णा सिंह, बृजेश सिंह, उग्रसेन, अखिलेश, सुरेन्द्र यादव, महेन्दर, सतीश, लल्लन, महेश, आदि मौजूद रहे।