
आधुनिक तकनीकों से जुड़ेगा पशुधन विकास प्रशिक्षण केंद्र, किसानों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। पशुपालन को पारंपरिक तरीकों से निकालकर वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की गई है। बस्ती स्थित पशुधन विकास प्रशिक्षण केंद्र को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। यहां किसानों और पशुपालकों को डेयरी, मुर्गी पालन, भेड़-बकरी पालन, पशु आहार और पशु स्वास्थ्य जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण की खासियत यह होगी कि इसे केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक अभ्यास, तकनीकों का प्रदर्शन और विषय विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन भी मिलेगा। इसका उद्देश्य पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य में सुधार के साथ पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करना है।
शासन की ओर से प्रशिक्षण केंद्र के संचालन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। केंद्र पर किसानों और पशुपालकों के अलावा पशुधन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों तथा अन्य हितधारकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में डेयरी प्रबंधन, संतुलित पशु आहार एवं पोषण, मुर्गी पालन और भेड़-बकरी पालन की आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर रहेगा।
पशुओं में होने वाली बीमारियों की पहचान, बचाव और उपचार संबंधी प्राथमिक जानकारी भी प्रशिक्षण का हिस्सा होगी। विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षणार्थियों को तकनीकी जानकारी देने के साथ वैज्ञानिक तरीकों को व्यवहार में लागू करने के तरीके बताएंगे।
पशुपालन विभाग से जुड़े मैत्री, पैरावेट्स, लैब टेक्नीशियन, पशुधन सहायक और पशु सखी सहित अन्य कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्र के संचालन के लिए वार्षिक और मासिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी।
इस प्रशिक्षण का लाभ केवल बस्ती जिले तक सीमित नहीं रहेगा। दूसरे क्षेत्रों के किसान और पशुपालक भी केंद्र की प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र पर इंटरनेट, बिजली और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की जाएगी।
विभागीय योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों की जानकारी देकर पशुपालन को किसानों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन से जुड़े लोगों को बेहतर प्रबंधन और उत्पादन तकनीकों को अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
