Tuesday, June 23, 2026
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सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की

✍️ विजय गुंजन

भारत की भाग्यरेखा से भ्रष्टाचार का अंधकार मिटे,
जन-जन की चेतना से नवक्रांति का बिगुल फूटे।
उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

बौद्धिक संवाद का विस्तार हो, विवादों का अंत हो,
दुराचारी नेतृत्व का प्रभाव क्षीण और जनमत प्रबल हो।
लोकतंत्र के मंदिर से लेकर जनता के घर-आँगन तक,
मानव अधिकारों पर कोई अतिक्रमण न हो।
जनहित के पक्ष में व्यवस्था का नव निर्माण हो,
अमीरों के महलों से लेकर गरीबों की झोपड़ियों तक,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

रक्तरंजित विचारों का परित्याग आवश्यक है,
मन में उठी नफरत की दीवारों का विनाश आवश्यक है।
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च के द्वारों तक,
सद्भाव का संदेश पहुँचे,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

समय की पुकार है कि राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त बने,
शांति, न्याय और एकता के पथ पर देश अखंड रहे।
सड़क से खलिहान तक, धरा से आसमान तक,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

अपराध को संरक्षण नहीं, दंड मिले,
न्याय की चौखट पर कोई निर्दोष अश्रु न बहाए।
कोतवाली से अदालत तक व्यवस्था सुदृढ़ हो,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

सत्यनिष्ठ पत्रकारिता का सम्मान हो,
भ्रष्टाचार और शोषण करने वाला हर अधिकारी जवाबदेह हो।
सवर्ण, पिछड़े, दलित और वंचित सभी वर्गों तक,
समान अवसर और सम्मान पहुँचे,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

ज्ञान का प्रकाश फैले, तर्क का सम्मान हो,
अंधविश्वास पर विवेक की विजय हो।
भौतिक से अभौतिक, लौकिक से पारलौकिक चिंतन तक,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

सागर, सरिता और सरोवर सदैव हरित और स्वच्छ रहें,
वन, वृक्ष और वन्यजीव सुरक्षित एवं प्रसन्न रहें।
शहर से गाँव तक, भोर की किरणों से संध्या की छाँव तक,
प्रकृति और मानव का संतुलन बना रहे,
सही अर्थों में तभी होगी जय भारत माता की।

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