Sunday, March 1, 2026
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DVR कांड में साक्ष्य मिटाने की साजिश बेनकाब: शालिनी–संज़ीव की मुश्किलें बढ़ीं, दो बाबू और रडार पर

सबूतों के ‘कातिल’ और साहिबा के ‘सिपहसालार’ बेनकाब: DVR कांड में विभाग के दो शातिर बाबू रडार पर, साक्ष्य मिटाने के ‘खेल’ ने बढ़ाई शालिनी-संजीव की मुश्किलें!

बलिया से प्रयागराज तक पुलिस का डेरा; सीओ गोरखनाथ की रडार पर एक दर्जन कर्मचारी, ‘सफेदपोश’ सिंडिकेट में भगदड़, फोन पर बात करने से भी कतरा रहे कर्मचारी!

विशेष संवाददाता
गौरव कुशवाहा

देवरिया/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा ) शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में अब वह समय आ गया है जब ‘साजिश की परतों’ के पीछे छिपे चेहरों का हिसाब होगा। निलंबन और पहली गिरफ्तारी के बाद, गोरखपुर पुलिस ने अब अपना शिकंजा उन ‘अपराध के सहयोगियों’ पर कस दिया है जिन्होंने वर्दी को चुनौती देते हुए सरकारी दफ्तर में साक्ष्यों की डकैती डाली थी। फाइल 01 मार्च 01 के अनुसार, पुलिस ने उस DVR कांड का पर्दाफाश कर दिया है, जिसके तहत 20 फरवरी की महत्वपूर्ण फुटेज गायब करने की कोशिश की गई थी। इस मामले में शालिनी श्रीवास्तव के बेहद करीबी दो बाबुओं को गोरखपुर पुलिस ने तलब किया है, जिन पर नई हार्ड डिस्क लगाने और पुरानी गायब करने का संगीन आरोप है।

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फुटेज का ‘राजफाश’: पुलिस के पास सुरक्षित है डेथ-विजुअल?

​जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि 20 फरवरी को जब शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह अपनी व्यथा लेकर बीएसए शालिनी श्रीवास्तव से मिलने पहुंचे थे, तो वह पूरी मुलाकात सीसीटीवी में कैद हो गई थी। सूत्रों की मानें तो जांच टीमों ने इस फुटेज का बैकअप पहले ही एक पेनड्राइव में सुरक्षित कर लिया था। यही वजह रही कि जब अगले दिन शातिर बाबुओं ने हार्ड डिस्क बदलकर सबूत मिटाने की कोशिश की, तो 5 घंटे की गहन जांच में पुलिस ने इस ‘डिजिटल चोरी’ को पकड़ लिया। एसपी सिटी अभिनव त्यागी के कड़े रुख ने उन बाबुओं को ‘सदमे’ में डाल दिया है जिन्होंने मैडम की वफादारी में अपना भविष्य दांव पर लगा दिया।

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सीओ गोरखनाथ की रडार पर एक दर्जन नाम

​विवेचना संभालते ही सीओ गोरखनाथ ने जांच की रफ्तार को ‘एक्सप्रेस’ गति दे दी है। जेल जा चुके बिचौलिए अनिरुद्ध सिंह द्वारा उगले गए राज अब विभाग के दर्जनों कर्मचारियों के गले की फांस बनने वाले हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह पुष्टि हो चुकी है कि फरार बाबू संजीव सिंह, शिक्षक कृष्ण मोहन, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बीच लगातार संवाद हो रहा था। यह संवाद काम के लिए नहीं, बल्कि दाम के लिए था। सूत्रों का दावा है कि विभाग के भीतर एक ऐसा डर व्याप्त है कि वसूलीबाज कर्मचारी अब आपस में फोन पर बात करने तक से कतरा रहे हैं; गुप्त स्थानों पर छिपकर मुलाकातों का दौर चल रहा है।

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चार जिलों में दबिश, पर ‘लोकेशन’ बनी पहेली

​निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में खाक छान रही हैं। शातिर आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर रखे हैं, जिससे पुलिस को ‘लोकेशन’ ट्रेस करने में तकनीकी बाधा आ रही है। हालांकि, एसपी सिटी ने स्पष्ट किया है कि घेराबंदी पुख्ता है और आरोपियों की संख्या बढ़ना तय है। पुलिस अब उन ‘मददगारों’ की सूची बना रही है जिन्होंने फरारी के दौरान आरोपियों को पनाह दी या वित्तीय सहायता पहुंचाई।

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खबर की पृष्ठभूमि में वह ‘बलिया कनेक्शन’ अब भी हावी है, जिसने इस पूरे सिंडिकेट को खाद-पानी दिया। शालिनी और संजीव की क्षेत्रीय निकटता ने सरकारी दफ्तर को उगाही केंद्र बना दिया था। डीएम दिव्या मित्तल और सीडीओ राजेश कुमार सिंह की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अब पुलिस के लिए ‘रोडमैप’ का काम कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या साक्ष्य मिटाने वाले ये बाबू सरकारी गवाह बनेंगे या फिर ‘साहिबा’ के साथ जेल की सलाखों के पीछे जाएंगे?

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