Friday, February 20, 2026
HomeNewsbeatसच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का...

सच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का संदेश

आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच बोलो” का संदेश हमें जीवन की वास्तविक दिशा दिखाता है। यह प्रेरक कविता मानव जीवन, ईश्वर की रचना और सकारात्मक सोच की शक्ति को उजागर करती है।

✍️ सच देखो सच सुनो सच बोलो – प्रेरक कविता
दोनो आँखों के साथ बग़ल में दोनों
कान नहीं होते तो चश्मा कहाँ लगाते,
बूढ़े होकर आँखों की रोशनी कम हो
जाती तो कैसे दुनिया को देख पाते।
यह उस ईश्वर की ताक़त है,
मुँह, आँख, कान, नाक चारों,
पूरी सुंदरता के साथ बनाए हैं,
उसकी कृतियाँ सबको भाए हैं।
सच देखो सच सुनो सच बोलो,
और सदा इन सबकी खुशियाँ लो,
सोच सकारात्मक ही रहे हमेशा,
सादा जीवन, सरलता अपना लो।
जिस तराजू से औरों को तौलते हैं,
उस पर बैठकर खुद को भी तौलो,
जीवन की सत्यता परख कर लो,
आदित्य, इसको आसान बना लो।
📖 कविता का भावार्थ
यह कविता हमें बताती है कि ईश्वर ने मानव शरीर को संतुलित और सुंदर बनाया है। आँख, कान, नाक और मुख — ये सभी इंद्रियाँ हमें जीवन का सत्य समझने का माध्यम देती हैं।
“सच देखो सच सुनो सच बोलो” केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन जीने का मूल मंत्र है। जब हम सकारात्मक सोच अपनाते हैं और सादा जीवन जीते हैं, तब जीवन सहज और सफल बनता है।
🌟 क्यों जरूरी है – सच देखो सच सुनो सच बोलो?
मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है
रिश्तों में पारदर्शिता और विश्वास कायम रहता है
समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है
आत्ममूल्यांकन की आदत विकसित होती है
👤 कवि परिचय
विद्यावाचस्पति डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
(प्रेरक साहित्यकार एवं चिंतक)

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments