Tag: जीवन दर्शन

निंदा छोड़ें, आत्मचिंतन अपनाएं: यही है श्रेष्ठता का मार्ग

गोंदिया, महाराष्ट्र।“न विना परवादेन रमते दुर्जनोजन:। काक: सर्वरसान भुक्ते विनामध्यम न तृप्यति।।“अर्थात् दुष्ट व्यक्ति बिना निंदा किए आनंद नहीं पाते, जैसे कौआ सभी रसों का सेवन करता है, परंतु गंदगी…

मन को हल्का बनाएं, अपेक्षाओं से दूरी बढ़ाएं

— नवनीत मिश्रमनुष्य का जीवन अपेक्षाओं के ताने-बाने से बुना हुआ है। हम हर दिन, हर संबंध और हर परिस्थिति से कुछ न कुछ उम्मीद रखते हैं। ये अपेक्षाएँ कभी…

तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा नहीं, सफलता का आधार: सकारात्मक सोच की असली ताकत

गोंदिया। आधुनिक डिजिटल युग में जहां विज्ञान और तकनीक ने दुनिया को नई दिशा दी है, वहीं आज भी कुछ अंधविश्वास और गलत धारणाएं समाज में गहराई से जमी हुई…

जीव अविनाशी — जीवन और मृत्यु का शाश्वत सत्य

सच है, सत्य मानो जैसे पाताल में खो गया हो,अब तो झूठ ही जगत पर छाया हुआ प्रतीत होता है।पुरानी कहावत भी आज सच लगती है—“दो टके की पगड़ी, छ:…

सच देखो, सच सुनो, सच बोलो: सकारात्मक सोच और सादा जीवन का संदेश

आज के दौर में जब भ्रम, दिखावा और नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, तब “सच देखो सच सुनो सच बोलो” का संदेश हमें जीवन की वास्तविक दिशा दिखाता है।…

सुप्रभात तो एक बहाना है: आस्था, धैर्य और जीवन दर्शन पर प्रेरक कविता

लेखक: डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’ सुप्रभात तो एक बहाना हैजब सूर्य की कृपा होती है, सूर्य कीकिरणें प्रकाश देती हैं, भगवान कीकृपा से ही उसके दर्शन हो सकते हैंऔर…

मानसिक शांति के लिए बेपरवाही क्यों ज़रूरी है

बेपरवाही का मंत्र: चाह गई तो चिंता मिटी, मानसिक शांति पाने का सरल उपाय 🧠 भूमिका“चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।”यह दोहा आज के तनावग्रस्त जीवन में मानसिक शांति का…

संघर्ष, करुणा और कर्म: जीवन को समझने का समग्र दृष्टिकोण

कैलाश सिंह महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जीवन केवल जन्म और मृत्यु के बीच की एक सीमित यात्रा नहीं है, बल्कि यह निरंतर उठते प्रश्नों और उन्हीं प्रश्नों से जन्म लेते उत्तरों…

कर्म

कर्तव्य करिए, फल की इच्छा नहींआस्था और विश्वास की ताक़त सेटूटते हुये सम्बंध बार बार जुड़ जाते हैं,लोगों की उजड़ी अंधियारी दुनिया मेंइनके द्वारा हरियाली प्रकाश फैलाते हैं। आदर्श, अनुशासन,…

पंचशील ध्वज के रंगों में समाया बुद्ध का जीवन दर्शन

नवनीत मिश्र आज का मानव समाज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। भौतिक उपलब्धियाँ बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक अशांति, असहिष्णुता और वैचारिक भ्रम भी उतनी ही तेजी से…