🔴 सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को बड़ा झटका, I-PAC रेड मामले में नोटिस जारी, ED के आरोप ‘बेहद गंभीर’
नई दिल्ली/कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी आई-पैक (I-PAC) से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे के मामले में गंभीर संवैधानिक संकट में घिरती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न केवल हस्तक्षेप के आरोपों को “बेहद गंभीर” बताया, बल्कि केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डालने के प्रश्न पर भी गहरी चिंता जताई।
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यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ईडी ने राजनीतिक दलों को रणनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कोलकाता स्थित कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। ईडी का आरोप है कि इस दौरान जबरन दस्तावेज और डिजिटल सामग्री उठाकर ले जाने की कोशिश की गई और जांच एजेंसी के काम में बाधा पहुंचाई गई। इसी आधार पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर CBI जांच की मांग की।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि यदि किसी राज्य की पुलिस या संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी गंभीर आर्थिक अपराध की जांच में केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप करता है, तो यह संघीय ढांचे और कानून के शासन के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एजेंसियां सद्भावना से जांच कर रही हैं, तो दलगत राजनीति की आड़ में उन्हें रोका नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर भी तत्काल रोक लगा दी और पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि छापेमारी से जुड़ी सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाए।
ईडी की दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि ममता बनर्जी का छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप एक “खतरनाक मिसाल” है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा दस्तावेज और डिजिटल सामग्री ले जाना केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिराने वाला कदम है। ईडी का दावा है कि आई-पैक कार्यालय से ऐसे सबूत मिले हैं जो आपत्तिजनक हैं और जांच के लिए बेहद अहम हैं।
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ममता बनर्जी की ओर से बचाव
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी डिजिटल उपकरण ले जाने का आरोप झूठा है, जिसकी पुष्टि ईडी के अपने पंचनामे से होती है। सिब्बल ने सवाल उठाया कि कोयला घोटाले से जुड़े मामले में फरवरी 2024 के बाद ईडी निष्क्रिय क्यों थी और चुनावों के बीच अचानक इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।
ममता बनर्जी ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताते हुए कहा कि ईडी तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक रणनीति, उम्मीदवारों की सूची और गोपनीय डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी, जो किसी भी तरह से एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। तब तक नोटिस का जवाब दाखिल करना होगा। यह मामला न केवल ममता बनर्जी बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी दूरगामी असर डाल सकता है।
