घनश्याम तिवारी की रिपोर्ट

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। करनई गांव को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाले तीन प्रमुख संपर्क मार्ग लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं। खराब सड़कों के चलते ग्रामीणों, विद्यार्थियों, महिलाओं और राहगीरों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक इन मार्गों से करनई के साथ केशरुआ, चन्दुकी, रजवाड़, मठिया, रंगीला डेरा, कुदन डेरा और पनपोखरा समेत आसपास के क्षेत्रों की करीब 20 से 25 हजार आबादी प्रभावित होती है।

ग्रामीणों के अनुसार पहला प्रमुख मार्ग सोबाईबांध से गौरीशंकर राय कन्या महाविद्यालय, बाजार होते हुए नहर की ओर जाता है। सड़क कई स्थानों पर खराब हो चुकी है। बरसात के दौरान जलभराव और कीचड़ के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
दूसरे मार्ग को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि करनई हनुमान मंदिर से ओमप्रकाश तिवारी के घर तक आरसीसी निर्माण प्रस्तावित था। आरोप है कि मार्ग का निर्माण रवि तिवारी के द्वार तक ही कराया गया और आगे का हिस्सा अधूरा छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने इस संबंध में संबंधित विभाग के अभिलेखों के आधार पर स्वीकृति, निर्माण कार्य और भुगतान की जांच कराने की मांग की है।
तीसरे संपर्क मार्ग पर भी निर्माण की स्थिति एक समान नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक कहीं आरसीसी, कहीं खड़ंजा, करीब 20 मीटर हिस्सा कच्चा और शेष हिस्से में इंटरलॉकिंग है। अलग-अलग प्रकार के निर्माण के कारण पूरे मार्ग पर सुगम आवागमन नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तीनों मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कराने, अधूरे हिस्सों को पूरा करने और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्य से संबंधित भुगतान अभिलेखों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई है।
इस दौरान शंकर दानी तिवारी, हरि नारायण तिवारी, गुड्डू तिवारी, पंचानंद तिवारी, सत्यदेव तिवारी, रत्नेश तिवारी, ओमप्रकाश गोंड, विनोद गोंड, राज नारायण यादव, अतुल प्रजापति, वागीश शुक्ल, उमेश गोंड, मोहन गुप्ता, बृजमोहन गुप्ता सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
