गंगा व पवित्र नदियोमें आज लगेगी आस्था की डुबकी

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्मावलंबिंयों के लिए सबसे पुण्यकारी मास कार्तिक के शुक्ल पूर्णिमा आज सोमवार को कृतिका नक्षत्र के साथ शिव योग व सर्वार्थ सिद्धि योग के सुयोग में मनायी जाएगी व भारतीय संस्कृक्ति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहात्म्य है। इस दिन काशी में देवताओं की दीपावली के रूप में देव दीपावली महोत्सव मनाया जाएगा।
आज अनेक धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्रान, पूजन और दान-धर्म का विधान है। वर्ष के बारह मासों में कार्तिक मास आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। श्रद्धालु पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद श्री सत्यनारायण प्रभु को कथा का श्रवण, गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व नमो भगवते वासुदेवाय का जप करके पापमुक्त- कर्जमुक्त होकर भगवान विष्णु की कृपा पाएंगे।
कार्तिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु की अपार कृपा बरसती है। आज के दिन गंगा स्रान से शरीर में पापों का नाश एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। भगवान नारायण ने अपना पहला अवतार मत्स्य अवतार के रूप में कार्तिक पूर्णिमा को लिए थे। आज भगवान विष्णु के निकट अखण्ड दीप दान करने से दिव्य कान्ति की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक को धन, यश, कीर्ति का लाभ भी मिलता है। गंगा स्नान के बाद दीप-दान करना दस यज्ञों के समान होता है। आज अन्, धन, वस्त्र, घी आदि दान करने से कई गुना फल मिलता है।
कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 26 नवंबर रविवार को शाम 03.15 बजे से शुरू गया था। जो आज सोमवार की दोपहर 02.30 बजे तक पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। इसीलिए उदयातिथि मान से आज पूरे दिन स्नान-दान, पुण्य आदि धर्मकृत्य होगा।
कार्तिक माह की त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को पुराणों ने अति पुष्करिणी कहा है। स्कंद पुराण के अनुसार जो प्राणी कार्तिक मास में प्रतिदिन स्नान नही करता है, वह यदि केवल इन तीन तिथियों में सूर्योदय से पूर्व स्नान करे तो भी पूर्ण फल का भागी हो जाता है। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्रान करने का बहुत महत्व बताया गया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्रान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति है। घर पर स्नान करने वाले जातक पानी में गंगाजल और हाथ में कुश लेकर स्नान करें तो उससे भी गंगा स्नान का ही फल मिलता है। इस दिन गंगा स्नान, दीप-दान, हवन, जाप आदि करने से सांसारिक पाप और ताप दोनों का नाश होता है।

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