जब इतिहास की रोशनी बुझी, पर प्रेरणा अमर हो गई

3 दिसंबर को बिछड़ीं भारत की महान आत्माएँ

3 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के उन अमर पन्नों की याद दिलाती है, जहां राष्ट्र-सेवा, संस्कृति, सिनेमा, साहित्य और खेल-जगत के महान स्तम्भों ने इस संसार को अलविदा कहा। इन विभूतियों का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं था, बल्कि युगों, विचारों और प्रेरणाओं का मौन हो जाना था। आइए, इन्हीं महान व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हैं।

ये भी पढ़ें –कान्हा गोशाला का डीएम ने किया निरीक्षण, गोवंश संरक्षण की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के दिए निर्देश

धर्मपाल गुलाटी (निधन: 2020)

धर्मपाल गुलाटी का जन्म वर्ष 1923, स्थान सियालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। भारत-पाक विभाजन के बाद वे दिल्ली आकर बस गए और मेहनत व ईमानदारी की नींव पर खड़ी कर दी भारत की सबसे प्रसिद्ध मसाला कंपनी ‘एमडीएच (महाशय दी हट्टी)’।
वे उद्योगपति होने के साथ-साथ एक महान समाजसेवी भी थे। उन्होंने शिक्षा, महिलाओं के उत्थान और गरीबों की सहायता में करोड़ों रुपये दान किए। उनका सादा जीवन और महान सोच उन्हें जन-जन का प्रिय बनाती रही। वे दिल्ली प्रांत में रहते हुए भी पूरे भारत में गुणवत्तापूर्ण मसालों के लिए जाने जाते थे। उनका जीवन उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी का आदर्श उदाहरण है।

ये भी पढ़ें –अंबेडकर प्रतिमा खंडित, पुरैना खंडी चौरा थाना घुघली जिला महराजगंज में तनाव, पुलिस ने नई मूर्ति स्थापित कर कराया माहौल शांत

देव आनंद (निधन: 2011)

देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923, गुरदासपुर (ज़िला), पंजाब में हुआ था। वे भारतीय सिनेमा के ऐसे सितारे रहे, जिनकी चमक दशकों तक कायम रही। ‘गाइड’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं।
एक अभिनेता होने के साथ-साथ वे निर्माता, निर्देशक और लेखक भी थे। उन्होंने भारतीय फिल्मों को एक नई दिशा दी और युवाओं के लिए फैशन-आइकन बनकर उभरे। पंजाब की मिट्टी से जन्मे देव आनंद ने पूरे भारत को अपनी प्रतिभा से गौरवान्वित किया।

ये भी पढ़ें –बरवां खुर्द पर टूटा दुःखों का पहाड़, कर्नाटक में करंट लगने से दो की मौत

विष्णु डे (निधन: 1982)

बांग्ला साहित्य जगत के महान स्तंभ विष्णु डे का जन्म 1909, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। वे एक प्रख्यात कवि, निबंधकार और आलोचक थे। उन्हें 1971 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और गहन दार्शनिकता के दर्शन होते हैं। उन्होंने बंगाली साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। पश्चिम बंगाल की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

ये भी पढ़ें –“समाज और जिंदगी की असली ताक़त दुःख-सुख बांटने और एकता में – इबरार अहमद

मेजर ध्यानचंद (निधन: 1979)

29 अगस्त 1905, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में जन्मे मेजर ध्यानचंद हॉकी के ऐसे चमकते सितारे थे, जिन्हें “हॉकी का जादूगर” कहा जाता है। भारत को उन्होंने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया।
उनकी तकनीक और खेल कौशल देखकर दुनिया के बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हैरत में पड़ जाते थे। देश के सम्मान के लिए उन्होंने सेना के साथ खेल को भी सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाया। उत्तर प्रदेश की भूमि ने देश को एक ऐसा गौरव दिया, जिसे लोग आज भी श्रद्धा से स्मरण करते हैं।

ये भी पढ़ें –डीएम ने की धान खरीद की समीक्षा

लांस नायक अल्बर्ट एक्का (निधन: 1971)

अल्बर्ट एक्का का जन्म 27 दिसंबर 1942, गुमला (झारखंड) में हुआ था। वे भारतीय सेना के एक महान वीर थे जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में असाधारण bravery दिखाई।
उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन की चौकियों को नष्ट किया और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अद्भुत साहस और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए शौर्य और देशभक्ति का प्रतीक है।

Editor CP pandey

Recent Posts

राहुल गांधी का छात्र संवाद इंदौर में, जमीन आवंटन पर कांग्रेस और सरकार आमने-सामने

इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को मिली जमीन, सियासी आरोपों पर…

8 hours ago

तीन श्रद्धालुओं के श्रमदान से जागा प्रशासन

79 सफाईकर्मियों ने संभाली पोखरे की सफाई गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)पूर्वांचल के प्रमुख शक्तिपीठ मां तरकुलहा…

9 hours ago

डर के साए में नहीं, विश्वास के माहौल में हो शिक्षा-प्रदीप कुमार

भागलपुर /देवरियाक्या हमारी शिक्षा व्यवस्था सचमुच बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में आगे बढ़…

9 hours ago

निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक – नागेन्द्र नाथ शर्मा

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की बैठक में पत्रकारों की एकजुटता पर जोर सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा )ग्रामीण…

10 hours ago

आदित्य संकल्प गीत मैं गाता हूँ

हिंदी का साहित्यकार हूँ,हिंदी में कविता लिखता हूँ,पर बैसवारी मेरी बोली है,वह बोली मुझको प्यारी…

10 hours ago

मोती कॉलोनी में मचा हड़कंप, रिलायंस टावर पर चढ़ा युवक

पुलिस-फायर टीम के छूटे पसीने, समझाने में जुटा प्रशासन संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय…

15 hours ago