Categories: Uncategorized

‘अपराजिता’ बनने के लिए पहले घरों और कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना होगा

इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि मौत की सजा देने से यौन अपराध थम जाते हैं, लेकिन ऐसे अपराधों के बाद ज्यादा कठोर कानूनों की मांग पर अक्सर एक आधिकारिक प्रतिक्रिया होती है। यह कहकर कि “बलात्कार मानवता के लिए अभिशाप है और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक सुधारों की जरूरत है, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हर सरकार की है कि कानून प्रभावी ढंग से लागू किये जाएं और यौन हमलों को रोकने व दंडित करने के लिए पुलिस बिना पक्षपात के काम करे। अगर महिलाओं के लिए पहले घरों व कार्यस्थलों को महफूज बनाकर उनके आगे बढ़ने की राह से अवरोध हटाये जाएं, तो इंसाफ और अच्छे से दिया जा सकेगा.

-प्रियंका सौरभ

हरेक जघन्य यौन अपराध के बाद सजा-ए-मौत का शोर उठना और अध्यादेश जारी करके या विधेयक पारित करके इसे मान लेना, काफी आम हो गया है। दिल्ली में एक महिला से वहशियाना बलात्कार के बाद 2013 में आपराधिक कानूनों में बदलाव किया गया। उसके बाद, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों ने यौन हमले के लिए बढ़ी हुई सजा की खातिर संशोधन किये। अब पश्चिम बंगाल में अपराजिता महिला एवं बाल (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन) विधेयक, 2024 में यौन अपराधों के लिए दंड बढ़ाने का प्रावधान किया गया है, खास तौर पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए। विधेयक में बलात्कार के विशिष्ट मामलों के लिए अनिवार्य मृत्युदंड और त्वरित जांच जैसे कड़े उपाय प्रस्तुत किए गए हैं। यह किसी बड़ी आपराधिक घटना के बाद जन आक्रोश पर पश्चिम बंगाल की विधायी प्रतिक्रिया को उजागर करता है, जिसका उद्देश्य कानूनी ढाँचे को मजबूत करना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।

विधेयक में बलात्कार पीड़िता की मृत्यु होने अथवा मरणासन्न अवस्था में पहुंचने पर मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है , जिससे निवारक प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि यौन अपराधों की जांच 21 दिनों के भीतर पूरी की जाए , जिसका उद्देश्य न्याय में तेजी लाना है। विधेयक पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा को मजबूत करता है, तथा खुलासा करने पर 3-5 वर्ष के कारावास का प्रावधान करता है। विधेयक में यौन हिंसा के मामलों के लिए समर्पित विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रस्ताव है , जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। विधेयक, नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े मामलों को लक्षित करता है , कठोर दंड और बढ़ी हुई निगरानी लागू करता है। विधेयक, पुनर्वास और सामाजिक सुधारों के बजाय दंडात्मक कार्रवाइयों को अधिक प्राथमिकता देता है, तथा गहन प्रणालीगत मुद्दों की उपेक्षा करता है। कठोर दंड के बावजूद यौन अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो विशुद्ध दंडात्मक कानूनों के सीमित प्रभाव को दर्शाता है। विशेष न्यायलयों की स्थापना से मौजूदा न्यायिक ढाँचे पर दबाव पड़ सकता है, जिससे संभावित रूप से प्रक्रियागत देरी हो सकती है। निर्भया के बाद शुरू की गई फास्ट-ट्रैक कोर्ट को भी बोझिल कानूनी व्यवस्था और संसाधनों की कमी के कारण, इसी तरह की देरी का सामना करना पड़ा।

निवारक के रूप में मृत्यु दंड के उपयोग पर व्यापक रूप से बहस हुई है, परंतु इसकी प्रभावशीलता के साक्ष्य, सीमित हैं। वर्मा समिति की रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मृत्यु दंड से यौन अपराधों में पर्याप्त कमी नहीं आती है, इसलिए अधिक प्रभावी समाधानों की आवश्यकता है। यह विधेयक केंद्रीय कानून के साथ संभावित संघर्ष उत्पन्न करता है, जिससे कानूनी चुनौतियों के कारण कार्यान्वयन में देरी होने की संभावना है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार ऐसे संशोधनों के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है, जिससे कानून का लागू होना जटिल हो जाता है। विधेयक यौन हिंसा पर शिक्षा या जन जागरूकता अभियान जैसे निवारक उपायों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रम जागरूकता और रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो ऐसे अपराधों को कम करने के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।

पीड़ितों के लिए सशक्त पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणालियाँ शुरू करना दंडात्मक उपायों का पूरक होगा। यौन अपराध के मामलों से निपटने में होने वाली देरी को कम करने के लिए न्यायिक बुनियादी ढाँचे को अधिक संसाधन आवंटित करना आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा ई -कोर्ट परियोजना का उद्देश्य न्यायपालिका को डिजिटल बनाना है, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। स्कूली बच्चों और आम जनता को लक्षित करके जागरूकता अभियान चलाकर यौन हिंसा के मूल कारणों को संबोधित करते हुए इस तरह की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। सखी वन स्टॉप सेंटर पहल शिक्षा और जागरूकता प्रदान करती है, जिससे महिलाओं को अपराधों की जल्द रिपोर्ट करने का अधिकार प्राप्त होता है। राज्य के कानूनों का, केंद्रीय ढाँचे के साथ सामंजस्य होने से सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है और अनावश्यक संघर्ष से बचा जा सकता है।

केरल में राज्य की पहलों के साथ पोक्सो का सफल संरेखण, एक सहयोगी दृष्टिकोण के लाभों को दर्शाता है। स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण और लिंग संवेदीकरण जैसे दीर्घकालिक निवारक उपायों को शुरू करने से यौन हिंसा को रोकने में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है, जिसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है। अपराजिता विधेयक पश्चिम बंगाल में यौन हिंसा को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सार्वजनिक आक्रोश के प्रति विधायी प्रतिक्रिया को दर्शाता है। हालाँकि, प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है जो दंडात्मक उपायों को पुनर्वास , सार्वजनिक जागरूकता और बुनियादी ढाँचे के समर्थन के साथ जोड़ता है । राज्य और केंद्र के बीच एक समन्वित प्रयास, महिलाओं और बच्चों के लिए स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा तथा दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन और उन्नत सुरक्षा को बढ़ावा देगा।

इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि मौत की सजा देने से यौन अपराध थम जाते हैं, लेकिन ऐसे अपराधों के बाद ज्यादा कठोर कानूनों की मांग पर अक्सर एक आधिकारिक प्रतिक्रिया होती है। यह कहकर कि “बलात्कार मानवता के लिए अभिशाप है और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक सुधारों की जरूरत है, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हर सरकार की है कि कानून प्रभावी ढंग से लागू किये जाएं और यौन हमलों को रोकने व दंडित करने के लिए पुलिस बिना पक्षपात के काम करे। अगर महिलाओं के लिए पहले घरों व कार्यस्थलों को महफूज बनाकर उनके आगे बढ़ने की राह से अवरोध हटाये जाएं, तो इंसाफ और अच्छे से दिया जा सकेगा

-प्रियंका

Editor CP pandey

Recent Posts

नाले जस के तस: 9.50 लाख के सफाई टेंडर पर उठे सवाल, सभासद गौरव निषाद ने किया भुगतान रोक कर जांच की मांग

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर में नालों की सफाई…

1 hour ago

50 मछुआरों का एनएफडीपी पोर्टल पर हुआ पंजीकरण

कपरवार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l मछली पालन, झींगा पालन, मछली विक्रेताओं, मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा समूहों और…

2 hours ago

पंचायत चुनाव की निर्वाचक नामावली प्रकाशित, शुरू हुआ निरीक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील खलीलाबाद, मेंहदावल और धनघटा के अंतर्गत आने वाली…

2 hours ago

पुलिस भर्ती परीक्षा की शुचिता पर प्रशासन सख्त, डीएम-एसपी ने केंद्रों का किया औचक निरीक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2025 को निष्पक्ष, पारदर्शी,…

2 hours ago

सस्टेनेबिलिटी एम्बेसडर ग्लोबल एक्सचेंज कार्यक्रम में डीडीयू के सात विद्यार्थियों का चयन, बेंगलुरु में लेंगे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सात विद्यार्थियों का चयन इको नेटवर्क…

2 hours ago

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में प्रियंका का परचम, स्वर्ण पदक से बढ़ाया महाविद्यालय का गौरव

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रभादेवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद के शारीरिक शिक्षा संकाय (बीपीएड)…

2 hours ago