उत्तर प्रदेश के ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, उपखनिज रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था पर तत्काल निर्णय की मांग
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त उपखनिजों—स्टोन बैलास्ट, स्टोन डस्ट, रेत एवं अन्य निर्माण सामग्री—पर देय रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का कहना है कि वर्ष 2022 से विभागीय स्तर पर लगातार पत्राचार और निर्देशों के बावजूद अब तक स्पष्ट निर्णय न होने से प्रदेशभर के ठेकेदारों और अधिकारियों को गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समिति के अध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बताया कि लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियन्ता (विकास एवं विभागाध्यक्ष) तथा प्रमुख सचिव द्वारा समय-समय पर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए पत्र भेजे गए। इसके बावजूद दोनों विभागों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित नहीं हो सका, जिससे निर्माण कार्यों के दौरान रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत ठेकेदारों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रभाव विकास परियोजनाओं की प्रगति पर भी पड़ सकता है। समिति ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पूर्व में भेजे गए विभागीय पत्रों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबे समय से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
समिति का मानना है कि यदि रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट एवं एकरूप नीति लागू की जाती है तो निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रशासनिक विवाद कम होंगे तथा विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
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