अपर आयुक्त का निर्देश– मामले को गंभीरता से लें, गरीब को दिलाएं न्याय
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l सहजनवा तहसील क्षेत्र के अनंतपुर निवासी गरीब फरियादी मिठाई लाल पिछले 12 वर्षों से अपनी खरीदी हुई जमीन पर कब्जा छुड़ाने के लिए अधिकारियों और अदालतों के चक्कर काट रहा है। मामला आराजी संख्या 398 की 26 डिसमिल जमीन का है, जिसे मिठाई लाल ने वर्ष 2011 में बैनामा कर खरीदा था। आरोप है कि 2012 में भू-माफिया ने इस जमीन पर कब्जा कर मकान खड़ा कर दिया।
फरियादी के मुताबिक, कब्जा करने वाले लोगों ने वास्तव में आराजी संख्या 401 की रजिस्ट्री कराई थी, लेकिन जबरन 398 पर कब्जा कर मकान बना लिया। चार भाइयों द्वारा इस कब्जे को अंजाम दिया गया और तब से लेकर अब तक जमीन का वास्तविक मालिक अपनी ही जमीन से बेदखल है।
मामले में 25 जून 2016 को एसडीएम कोर्ट ने मिठाई लाल के पक्ष में आदेश भी दिया था। तहसील से आई रिपोर्ट भी 398 के समर्थन में थी। इसके बावजूद जमीन का कब्जा नहीं छूट सका और भू-माफिया अब भी हावी बने हुए हैं।
अब फरियादी को अधिकारियों की ओर से राय दी गई है कि वह सिविल कोर्ट जाए और वहां से आदेश लेकर आए, तभी कब्जा हटवाकर मकान गिराया जा सकेगा। इस बीच, मंडलायुक्त कार्यालय में गुहार लगाने पर अपर आयुक्त ने एसडीएम सहजनवा को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मामले को गंभीरता से लें और पीड़ित को न्याय दिलाएं।
मिठाई लाल का आरोप है कि 2012 में तत्कालीन एसओ और तहसीलदार की मिलीभगत से ही भू-माफिया ने उसकी जमीन पर कब्जा कर मकान बना लिया था। यही वजह रही कि वर्षों तक आदेशों के बावजूद कब्जा खाली नहीं कराया गया।
गरीब फरियादी का कहना है कि वह एक दशक से अधिक समय से न्याय पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। अब उसे उम्मीद है कि एसडीएम और तहसील प्रशासन सक्रिय होकर उसकी जमीन को कब्जामुक्त कराएंगे।
इस प्रकरण ने तहसील और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तहसील से रिपोर्ट और एसडीएम कोर्ट का आदेश फरियादी के पक्ष में था, तब भी कब्जा क्यों नहीं हटाया गया? अब देखना यह होगा कि सिविल कोर्ट से आदेश आने के बाद प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और एक गरीब को उसका हक दिलाता है।
