आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद के साहित्यिक व सामाजिक विमर्श– कृष्ण कुमार यादव
“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी मशाल भी है।” यह कथन प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अक्षरशः खरा उतरता है। युगों-युगों तक पढ़े जाने वाले साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी मशाल भी है।” यह कथन प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अक्षरशः खरा उतरता है। युगों-युगों तक पढ़े जाने वाले साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद…