गरबे का जोश, शरीर बेहोश! नौ दिन के डांस में घुटनों की निकली हवा
व्यंग्य-लेखक: संजय एम. तराणेकर (कवि, लेखक एवं समीक्षक) पहले गरबा माता की आराधना का माध्यम हुआ करता था। लोग श्रद्धा के साथ कुछ कदम थिरकते, प्रसाद ग्रहण करते और घर…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
व्यंग्य-लेखक: संजय एम. तराणेकर (कवि, लेखक एवं समीक्षक) पहले गरबा माता की आराधना का माध्यम हुआ करता था। लोग श्रद्धा के साथ कुछ कदम थिरकते, प्रसाद ग्रहण करते और घर…