मेज़ों पर पानी का राज़…!
जनता प्यासी, व्यवस्थाओं पर सवाल और पानी की एक-एक बूंद की कीमत पर सवाल उठाती कविता गरीब देश की ऊँची कुर्सी, अफसरशाही का अंदाज़,जनता प्यासी, सूखे हलक, मेज़ों पर पानी…
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जनता प्यासी, व्यवस्थाओं पर सवाल और पानी की एक-एक बूंद की कीमत पर सवाल उठाती कविता गरीब देश की ऊँची कुर्सी, अफसरशाही का अंदाज़,जनता प्यासी, सूखे हलक, मेज़ों पर पानी…