मौत का जाम…!
सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…
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सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…
कमाल अमरोही (1918–1993)कमाल अमरोही भारतीय सिनेमा के महान निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक थे। पाक़ीज़ा, मुग़ल-ए-आज़म जैसी कालजयी फ़िल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। 11 फ़रवरी 1993 को मुंबई में उनका…