स्वास्तिक गणेशजी का स्वरूप,
स्वास्तिक की दो अलग-अलग
रेखायें श्री गणपति जी की पत्नी
रिद्धि-सिद्धि देवियों को दर्शाती हैं।
घर के बाहर स्वास्तिक प्रतीक व
शुभ -लाभ लिखने का प्रयोजन
यह होता है कि घर में सुख-शांति
और समृद्धि सदैव वृद्धिरत होती रहे।
शुभ- लाभ लिखने का भाव यह है
कि भगवान से लोग प्रार्थना करते हैं
कि उनके घर की संपदा और धन
सदा बढ़ता रहे, लाभ प्राप्त होता रहे।
शुभ-लाभ लिखना सुंदर तो है,
परंतु दिखावा अधिक होता है,
दरवाज़े का यह शुभ प्रतीक है,
मन में भी यही हो तो अच्छा है।
मन में लिखे शुभ-लाभ शुभ भी है,
व यही शुभ, लाभ भी हो जाते हैं,
आओ इस दीपावली में मन में भी
आदित्य शुभ – लाभ लिख लेते हैं।
डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’
गोरखपुर गोरक्ष प्रांत योजना बैठक—कार्ययोजना 2026 यह बैठक विश्व हिंदू परिषद, गोरक्ष प्रांत, गोरखपुर, योजना…
नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की राह पर कदम बढ़ाएंगी छात्राएं, 19 से 22 वर्ष आयु वर्ग…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण…
अनूप तिवारी देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अमर शहीद शिवराज उर्फ सोना सोनार के 84वें शहादत…
सरदार भगत सिंह ने ‘किरती’ में लिखी वीरों की गाथा काकोरी ट्रेन एक्शन केवल सरकारी…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कृषि संकाय में शुक्रवार को "सतत कृषि…