नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ₹27,000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरमैन अरविंद धाम को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें धाम की जमानत याचिका खारिज की गई थी।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति अराधे ने कहा कि अदालत ने अरविंद धाम की अपील को स्वीकार कर लिया है और उन्हें जमानत दी जाती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत क्यों की थी खारिज?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2024 को अरविंद धाम की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि समय से पहले रिहाई से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के चलते मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध देश की वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
उच्च न्यायालय के अनुसार, ऐसे मामलों में जांच जटिल और लंबी होती है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि निर्दोष व्यक्तियों को गलत तरीके से न फंसाया जाए और वास्तविक दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
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एमटेक ग्रुप की सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां कुर्क
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत एमटेक ग्रुप की कंपनियों की ₹550 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं।
इसके अलावा सितंबर 2024 में एजेंसी ने ₹5,115.31 करोड़ की अतिरिक्त संपत्तियां भी अटैच की थीं।
ईडी की कार्रवाई के तहत:
• राजस्थान और पंजाब में 145 एकड़ जमीन
• दिल्ली-एनसीआर में ₹342 करोड़ मूल्य की संपत्तियां
• ₹112.5 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस
को कुर्क किया गया।
ईडी का आरोप क्या है?
ईडी ने यह जांच 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू की थी। अरविंद धाम को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया था और सितंबर 2024 में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
एजेंसी का आरोप है कि एमटेक ग्रुप की कंपनियों ने वित्तीय दस्तावेजों में हेरफेर, फर्जी ऋण और संपत्तियां दिखाकर बैंकों को गुमराह किया। इस धोखाधड़ी के चलते बैंकों को 80% से अधिक का हेयरकट झेलना पड़ा और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ।
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