लेखक: राजकुमार अग्रवाल
संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरुआती 2025 से रिपब्लिकन पार्टी के निर्वाचित अधिकारियों द्वारा मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी में चिंताजनक और नाटकीय वृद्धि देखी गई है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (CSOH) की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों और गवर्नरों ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से 1,100 से अधिक पोस्ट साझा किए, जिनमें मुस्लिम अमेरिकियों को लेकर साजिश सिद्धांतों को बढ़ावा दिया गया।
इन पोस्ट्स में मुसलमानों के निर्वासन और नागरिकता समाप्त करने जैसी मांगें उठाई गईं, इस्लाम का नकारात्मक चित्रण किया गया, और मुस्लिम आबादी वाले शहरों को “आक्रमण” या “कब्जा” बताया गया। इतना ही नहीं, घरेलू आतंकवादी घटनाओं का इस्तेमाल कर मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश की गई, भले ही उन घटनाओं का मुसलमानों से कोई संबंध न हो।
इस तरह की भाषा और विचारधारा समाज में भय और घृणा का माहौल तैयार करती है। यह “डेंजरस स्पीच” की श्रेणी में आती है, क्योंकि इससे लोगों में किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा को उचित ठहराने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि यह बयानबाजी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही है, जिससे इसे वैधता का आभास मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 46 रिपब्लिकन अधिकारियों ने मुस्लिम अमेरिकियों को निशाना बनाते हुए 1,111 पोस्ट किए। इस अवधि में ऐसे पोस्ट्स की संख्या में 1,450 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें से पांच कांग्रेस सदस्यों ने कुल पोस्ट्स का 73 प्रतिशत हिस्सा बनाया, जबकि टेक्सास और फ्लोरिडा के नेताओं का योगदान 71 प्रतिशत रहा।
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“शरिया” से जुड़ी साजिशें लगभग आधे पोस्ट्स में दिखाई दीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह अभियान एक विशेष नैरेटिव के तहत संचालित किया गया। “आक्रमण”, “इस्लामीकरण” और “विजय” जैसे शब्दों का प्रयोग कर मुसलमानों को एक खतरे के रूप में प्रस्तुत किया गया। लगभग एक-तिहाई पोस्ट्स में मुसलमानों को आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से जोड़कर देखा गया।
इसके साथ ही, इस बयानबाजी का असर विधायी स्तर पर भी दिखा। जून 2025 से मार्च 2026 के बीच “शरिया” का उल्लेख करने वाले आठ विधेयक पेश किए गए। दिसंबर 2025 में “शरिया-फ्री अमेरिका” कैकस की स्थापना हुई, जो कुछ ही महीनों में 62 सदस्यों तक पहुंच गई। कुल मिलाकर 89 रिपब्लिकन अधिकारियों ने इस अभियान के किसी न किसी रूप में भाग लिया।
इस पूरे अभियान की शुरुआत 24 फरवरी 2025 को टेक्सास के गवर्नर द्वारा एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें एक प्रस्तावित मुस्लिम हाउसिंग प्रोजेक्ट को “शरिया शहर” बताया गया। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से फैलता गया और सोशल मीडिया से लेकर विधायिका तक पहुंच गया।
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यह घटनाक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक चेतावनी है। जब सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग किसी विशेष समुदाय के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, तो इससे न केवल उस समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि समाज में विभाजन और अविश्वास भी गहराता है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार और समावेशी भाषा का उपयोग करे। किसी भी प्रकार की घृणा और भेदभाव को बढ़ावा देना अंततः पूरे समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होता है।
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