गोरखपुर (राष्ट्र कि परम्परा डेस्क)। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर वर्ष मनाया जाने वाला ऋषि पंचमी पर्व इस बार गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के अगले दिन पड़ने वाला यह पर्व सप्त ऋषियों—कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, वशिष्ठ, गौतम, जमदग्नि और विश्वामित्र—की आराधना के लिए समर्पित है।
पंडित जय प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि इस दिन व्रत एवं पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मान्यता है कि ऋषि पंचमी व्रत से पापों का क्षय होता है और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं।
पंडित पाण्डेय ने पूजा-विधि बताते हुए कहा कि प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके पश्चात घर में सप्त ऋषियों की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीप प्रज्वलित कर पूजा आरंभ करें। पूजन सामग्री में पंचामृत, पुष्प, चंदन, धूप-दीप और फल-फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के समय सप्त ऋषियों की आरती करें, मंत्रजाप करें और व्रत कथा का श्रवण करें।
उन्होंने बताया कि कई श्रद्धालु इस दिन निर्जला व्रत या फलाहार का पालन करते हैं तथा पूरे दिन भगवान और सप्त ऋषियों का ध्यान करते हैं।
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