रोहनियां/वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में बीते शुक्रवार को करसड़ा मुसहर बस्ती से उजाड़े गए बाशिंदो से विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रविवार को पीड़ितों के बस्ती पहुंचकर मुलाकात की और आपबीती सुना। पीड़ितों ने कहा कि तहसीलदार मीनाक्षी पांडेय ने पुलिस को साथ लेकर बिना पुनर्वासन, व्यवस्थापन किए उनको बस्ती से उजाड़ दिया। कहा कि हमको इंसाफ दिलाया जाए।
यहाँ से उजाड़े गए लोगों के साथ दलित फ़ाउंडेशन के प्रतिनिधि अनिल कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने बैठक कर पीड़ित परिवारों ने फ़ाउंडेशन के माध्यम से एक ज्ञापन डीएम कौशल राज शर्मा, राष्ट्रीय मानवाधिकार, एससी-एसटी आयोग को देने पर सहमत होकर इंसाफ की गुहार लगाई। कहा कि वह 15-20 वर्षों से तहसील राजातालाब ग्राम करसड़ा गांव में रहते थे। हम सबका जिस जमीन पर घर बना था, उसका बकायदा सट्टा इकरारनामा हुआ है। हम यहां बहुत लंबे समय से रह रहे हैं। सामाजिक संस्था की पहल पर हमें बिजली का कनेक्शन दिया गया और अन्य सुविधाएं मिली है। करसड़ा गांव के प्रधान, स्थानीय लेखपाल, राजस्व निरीक्षक और भूमाफिया हम वनवासियों को कमजोर समझ कर बेघर कर दिए हैं। आरोप है मकानों पर बुल्डोज़र चलवा दिया और सारा सामान उठा कर बाढग्रस्त क्षेत्र में फेंक दिए। और हमको ज़मीन बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आवंटन करके यहाँ रहने को कहा गया हैं।
राजकुमार गुप्ता ने कहा कि पीड़ित परिवारों ने शनिवार को बस्ती में पहुँचे एसडीएम और एडीएम प्रशासन से पत्रक सौंपकर गुहार लगाई है कि दोषियों के खिलाफ ना सिर्फ कानूनी कार्यवाही की जाए बल्कि हमें हमारे आवास और जमीन वापस दिलाई जाए। इस मौके पर अनिल कुमार, राजकुमार गुप्ता, अनूप श्रमिक, बीरभद्र सिंह, धीरेंद्र गिरी सहित पीड़ित लोग भी मौजूद रह।
करसड़ा से उजाड़े बाशिंदो ने सामाजिक संगठनों को सुनाई आपबीती
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