साकीनाका मेट्रो स्टेशन के नीचे घुटनों तक पानी, असल्फा रोड जलमग्न
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा )मुंबई में सोमवार को हुई तेज़ बारिश ने एक बार फिर बृहन्मुंबई महानगरपालिका के दावों की पोल खोल दी। साकीनाका मेट्रो स्टेशन के नीचे की सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं, और असल्फा से घाटकोपर पूर्व तक का इलाका नाले के उफान से लबालब भर गया।
हर साल बारिश के मौसम में यही तस्वीर दोहराई जाती है। इस बार भी कोई अपवाद नहीं हुआ। करोड़ों रुपये के बजट खर्च और भारी-भरकम परियोजनाओं के बावजूद बीएमसी कुर्ला का एल -वार्ड जलनिकासी में नाकाम साबित हुआ है। सड़कें नहीं, मानो गंदे नाले बन चुकी हैं—जहाँ नागरिकों का विश्वास और टेक्स पेयर का पैसा पानी में बहता नजर आ रहा है।
स्थानीय पत्रकार पवन पाठक का कहना है कि हर बार इसी स्थिति से गुजरना 26 जुलाई 2005 की बाढ़ की भयावह यादें ताज़ा कर देता है। डर, असुविधा और संक्रमण का खतरा — यह अब साकीनाका के रहिवासियों का नियमित मानसून अनुभव बन गया है। उनका कहना है की घाटकोपर तक जाने वाली सभी सड़कें जाम हो गई है दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए लोग काम, स्कूल और अस्पताल तक नहीं पहुंच पाए।
इस बार मनपा ने दावा किया था कि नालों की सफाई, मोटर पंपों की व्यवस्था और वाटर लॉगिंग रोकने के लिए पर्याप्त इंतज़ाम किए गए हैं। परंतु, साकीनाका की स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई योजना धरातल पर उतरी ही नहीं।
पवन पाठक ने आरोप लगाया है की यह सिर्फ पानी नहीं, एल वार्ड मनपा प्रशासन की नाकामी का आईना है। जब तक मानसून से पहले ठोस काम नहीं होगा, तब तक साकीनाका हर साल इसी हालात में डूबता रहेगा।
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