ख़ुशियाँ तितली जैसी होती हैं,
चाहने से तो बहुत दूर उड़ जाती हैं,
जितना उनके पीछे भागेंगे वह,
हमसे उतनी ही दूर चली जाती हैं।
तितली को देख अगर हम पीछे
उसके न जा कर शांत प्रकृति में,
आनंद मग्न हों तब तो वह हमारे
आस पास ही आती जाती हैं ।
ख़ुशियाँ का भी ऐसा ही है आना
जाना बिन माँगे तो मिल जाती हैं,
माँगो चाहे जितना प्रभु से ख़ुशियाँ
अक्सर सबको बहुत तरसाती हैं ।
हर अच्छा इंसान हमेशा किसी न
किसी कहानी में, किसी किसी के
लिए तो अक्सर अच्छा भी होता है,
और किसी के लिए बुरा भी होता है।
अच्छाई और बुराई भी ख़ुशियों जैसी
चाहने से भी कोई नहीं समझता है,
समझाने भी यदि बैठ जाओ, अच्छे
को बुरा और बुरे को अच्छा कहता है।
मानव का स्वभाव जब अस्थिरता
और चंचलता के वश में होता है,
तितली जैसा व्यवहार स्वभाव वश
आदित्य बिन सोचे समझे करता है।
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