उद्घाटन हुआ, पानी नहीं आया; दो साल से कर रहे इंतजार दस हजार लोग
धीरेन्द्र त्रिपाठी
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद की कोपागंज नगर पंचायत में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पेयजल योजना लोगों के लिए राहत की जगह परेशानी का कारण बन गई है। नगर पंचायत क्षेत्र में शामिल छह मुहल्लों और आसपास की करीब दस हजार आबादी आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए जूझ रही है। स्थिति यह है कि नलकूप बन गए, पाइपलाइन बिछ गई, उद्घाटन भी हो गया, लेकिन दो साल बाद भी घरों तक पानी नहीं पहुंच सका।
विस्तारीकरण योजना के तहत वर्ष 2019 में कोपा कोहना, हिकमा, काछीकला, रजपुरा, भदसा मानोपुर और लाडनपुर को नगर पंचायत में शामिल किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि शहरी सुविधाएं मिलेंगी और पेयजल संकट दूर होगा, लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
करीब पांच वर्ष बाद नगर पंचायत प्रशासन ने पेयजल योजना पर काम शुरू कराया। कोपा कोहना पूर्वी, रामलीला मैदान, राजभर बस्ती, कोपा कोहना दक्षिणी, जूनियर हाईस्कूल परिसर, अंबेडकर प्रतिमा स्थल, वार्ड संख्या 12, वार्ड संख्या 9 और वार्ड संख्या 3 काछीकला समेत नौ स्थानों पर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नलकूप स्थापित किए गए। साथ ही घरों तक जलापूर्ति पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने और उद्घाटन के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं कराई गई। बीते 24 महीनों में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
गर्मी बढ़ने के साथ संकट और गहरा गया है। सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिससे लोग निजी समरसेबल लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई मोहल्लों में पानी के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं।
पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया, लेकिन मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। इससे जलभराव, कीचड़ और गंदगी की समस्या ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
स्थानीय निवासी परवेश पटवा का कहना है कि गांव को नगर पंचायत में शामिल किए जाने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर होता कि गांव ग्रामीण क्षेत्र में ही रहता। वहीं अजय शर्मा ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
रूद्रदत्त त्रिपाठी ने नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो साल से तैयार नलकूपों के बावजूद जलापूर्ति शुरू न होना गंभीर लापरवाही है और जल्द समाधान होना चाहिए।
मामले पर अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे प्रकरण की जांच कराकर संबंधित क्षेत्रों में पेयजल समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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