22 नवंबर भारतीय इतिहास में उन विभूतियों की स्मृति का दिन है, जिन्होंने अपनी सोच, कर्म और संघर्ष से समाज की धारा को बदला। विभिन्न युगों में जन्मी ये महान आत्माएँ भले आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनके योगदान की चमक आज भी मार्गदर्शक है।
राम नरेश यादव (2016)
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में जन्मे राम नरेश यादव ने साधारण परिवार से शिक्षा प्राप्त कर राजनीति की ऊँचाइयों तक सफर तय किया। यूपी के मुख्यमंत्री और बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक ईमानदारी और संगठनात्मक मजबूती का उदाहरण प्रस्तुत किया।
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विवेकी राय (2016)
ग़ाज़ीपुर जिले के बकैनिया गांव में जन्मे विवेकी राय ने हिन्दी और भोजपुरी साहित्य को नई पहचान दी। शिक्षक के रूप में शिक्षा जगत से जुड़े रहते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवन, सामाजिक संबंध और मानवीय संवेदनाओं को अपनी कलम से अमर किया।
तारा सिंह (1967)
ब्रिटिश भारत के पंजाब में जन्मे मास्टर तारा सिंह ने शिक्षा के साथ समाज-सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया। वे शीरोमणि अकाली दल के प्रमुख नेताओं में रहे और सिख पहचान, अधिकारों तथा समुदाय की एकजुटता के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते रहे।
अहमदुल्लाह (1881)
फैज़ाबाद (अवध) क्षेत्र में जन्मे मौलवी अहमदुल्लाह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से रहे। उन्होंने शिक्षा के साथ सैन्य रणनीति में दक्षता प्राप्त कर अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका और 1857 की क्रांति को धार दी।
रॉबर्ट क्लाइव (1774)
इंग्लैंड में जन्मा रॉबर्ट क्लाइव ईस्ट इंडिया कम्पनी का वह प्रशासक था जिसने भारत के राजनीतिक ढांचे पर निर्णायक प्रभाव डाला। शिक्षा के दौरान ही उसका झुकाव सैन्य सेवा की ओर हुआ और यही उसे भारत लाया, जहाँ उसके कदमों ने उपनिवेशी शासन की नींव मजबूत की।
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