बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। रसड़ा विकासखंड के चंद्रवार गांव की दलित बस्ती ने अपने हौसले और मेहनत से एक अनोखी मिसाल कायम की है। बरसों से टूटी-फूटी सड़क के कारण धूल और कीचड़ झेलते ग्रामीणों ने जब नेताओं और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई, तो उन्हें सिर्फ़ आश्वासन ही मिला। थक-हार कर अब उन्होंने अपने ही दम पर सड़क दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया, कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान किया और सड़क की मरम्मत शुरू कर दी। नाराज़ लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा – “रोड नहीं तो वोट नहीं।” उनका कहना है कि यदि अब भी समस्या का स्थायी हल नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव में मतदान से दूरी बना लेंगे।
सत्यजीवन, वासदेव, रामकेवल और राघवेंद्र राजभर जैसे ग्रामीणों की अगुवाई में महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर काम में जुटीं। गांव की यह जिद और संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। टूटी सड़क की धूल से उठी यह आहट नेताओं की नींद कब तोड़ेगी, यह देखने की बात है।
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