सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर 1 सितंबर से बड़ा कदम उठाते हुए “नो हेलमेट–नो फ्यूल” नियम लागू किया। आदेश साफ था—बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं मिलेगा। लेकिन सिकंदरपुर में यह नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। स्थानीय पेट्रोल पंपों पर खुलेआम बिना हेलमेट वाहन चालकों को ईंधन दिया जा रहा है। पंप मालिकों ने नियम पालन के लिए बैनर जरूर टांग रखे हैं, लेकिन उस पर अमल करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे। उनका कहना है कि अधिकतर ग्राहक स्थानीय होते हैं, इसलिए वे मना करने से कतराते हैं। परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को “पहले हेलमेट, बाद में ईंधन” की तर्ज पर अभियान को सख्ती से लागू कराने का निर्देश दिया है। लेकिन सिकंदरपुर में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग की सक्रियता नदारद दिखाई दे रही है।सरकार की मंशा इस अभियान से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की थी, मगर सिकंदरपुर में लापरवाह रवैये ने इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये है कि जब शासन स्तर से आदेश साफ है तो स्थानीय स्तर पर अमल कौन कराएगा
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