इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: तकनीकी सहायक भर्ती में बोर्ड की लापरवाही उजागर, अभ्यर्थी के लिए खुला नियुक्ति का रास्ता

इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को तलब किया है। न्यायमूर्ति Rajeev Singh ने मामले की सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (खादी एवं ग्रामोद्योग), उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव और बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को 15 जुलाई 2026 तक लिखित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

टॉपर अभ्यर्थी को नौकरी से किया गया था बाहर

मामला बहराइच निवासी अरविंद कुमार तिवारी से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2016 में आयोजित ‘तकनीकी सहायक रेशा’ भर्ती परीक्षा में सामान्य श्रेणी में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके बावजूद विभागीय समिति ने यह कहते हुए उनका चयन निरस्त कर दिया कि उनका प्रशिक्षण “सनई के रेशे” में नहीं, बल्कि “टेक्सटाइल केमिस्ट्री” में है।

हैरानी की बात यह रही कि इसी संस्थान और समान योग्यता वाले अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र विभाग द्वारा मान्य कर लिए गए थे। इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

स्पेशल अपील के बाद फिर शुरू हुई सुनवाई

पीड़ित अभ्यर्थी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। प्रारंभिक स्तर पर देरी के तकनीकी आधार पर याचिका का निस्तारण कर दिया गया था। इसके बाद अधिवक्ता अभिषेक कुमार द्विवेदी, आबिद अल्वी और वर्षा सिंह ने स्पेशल अपील संख्या 165/2026 दाखिल की।

स्पेशल अपील में अधिकारियों की कार्यप्रणाली और चयन प्रक्रिया में कथित मनमानी का मुद्दा उठाए जाने के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया और मूल याचिका की दोबारा सुनवाई शुरू हुई।

कोर्ट की सख्ती के बाद बोर्ड ने मानी गलती

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। अदालत के सख्त रुख के बाद खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की। संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव की अध्यक्षता में गठित समिति ने जांच के बाद माना कि सेवा विनियमावली-2005 में “सनई के रेशे” में प्रशिक्षण की कोई अनिवार्यता नहीं थी।

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों के विपरीत जाकर अरविंद कुमार तिवारी का अभ्यर्थन निरस्त किया। रिपोर्ट में इसे “स्पष्ट लापरवाही एवं उदासीन कार्यप्रणाली” बताया गया।

खाली पद पर नियुक्ति की संभावना बढ़ी

जांच में यह भी सामने आया कि इसी पद पर चयनित एक अन्य अभ्यर्थी ने ज्वाइन नहीं किया था, जिससे पद अभी भी रिक्त है। इसके बाद बोर्ड के CEO शिशिर ने शासन को पत्र भेजकर अरविंद कुमार तिवारी की नियुक्ति के लिए अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे हैं।

अदालत ने बोर्ड की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद प्रदेश के भर्ती बोर्डों और प्रशासनिक विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।

Karan Pandey

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