सुंदरता के नाम पर सेहत से खिलवाड़ बंद, अवैध कॉस्मेटिक इंजेक्शन पर सख्त कार्रवाई शुरू

सुंदरता की अंधी दौड़ पर सरकार की सख्ती: कॉस्मेटिक इंजेक्शन पर CDSCO की बड़ी चेतावनी, अब होगी कठोर कानूनी कार्रवाई


भारत में तेजी से बढ़ती ब्यूटी और एस्थेटिक इंडस्ट्री के बीच केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। 21 मई 2026 को भारत की दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organization (सीडीएससीओ) ने सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद का उपयोग इंजेक्शन के रूप में नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा है कि ऐसा करना औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 का उल्लंघन माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आज ग्लोइंग स्किन, इंस्टेंट फेयरनेस, एंटी-एजिंग थेरेपी, स्किन टाइटनिंग और इंस्टेंट ब्यूटी ट्रीटमेंट का बाजार तेजी से फैल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ऑनलाइन विज्ञापनों और तथाकथित “इंस्टेंट रिजल्ट” देने वाले क्लीनिकों ने लोगों में आकर्षक दिखने की होड़ को और तेज कर दिया है। लेकिन इसी चमक-दमक के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी छिपा हुआ है। देशभर में कई ब्यूटी क्लीनिक और अवैध केंद्र कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल इंजेक्शन के रूप में कर रहे हैं, जबकि ऐसे उत्पाद केवल बाहरी उपयोग के लिए बनाए जाते हैं।
सरकार के अनुसार कॉस्मेटिक उत्पादों का उद्देश्य केवल त्वचा की सफाई, सुगंध, सौंदर्य बढ़ाना और बाहरी रूप को आकर्षक बनाना होता है। यदि किसी उत्पाद को इंजेक्शन या इन्फ्यूजन के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंचाया जाता है, तो वह सामान्य कॉस्मेटिक की श्रेणी से बाहर हो जाता है और उसके लिए अलग चिकित्सकीय अनुमति, वैज्ञानिक परीक्षण तथा सुरक्षा मानक आवश्यक होते हैं। यही कारण है कि सीडीएससीओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के रूप में उपयोग करना कानून का सीधा उल्लंघन है।
विशेषज्ञों के अनुसार बीते कुछ वर्षों में ग्लूटाथियोन इंजेक्शन, इंस्टेंट ग्लो थेरेपी, स्किन व्हाइटनिंग इंजेक्शन, फेस लिफ्ट इंजेक्शन और एंटी-एजिंग इंजेक्शन जैसे उपचारों का चलन तेजी से बढ़ा है। कई क्लीनिक इन्हें पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक बताकर प्रचारित करते हैं, जबकि अधिकांश मामलों में इनके पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं होते। सबसे गंभीर चिंता यह है कि कई स्थानों पर बिना प्रशिक्षित या गैर-चिकित्सकीय व्यक्ति ऐसे इंजेक्शन लगा रहे हैं, जिससे संक्रमण, एलर्जी, त्वचा क्षति, नसों को नुकसान, हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।


सरकार का मानना है कि सौंदर्य उपचार के नाम पर लोगों की भावनाओं और असुरक्षाओं का व्यावसायिक लाभ उठाना अत्यंत खतरनाक प्रवृत्ति बन चुकी है। गलत तरीके से लगाए गए इंजेक्शन से सेप्सिस, चेहरे की स्थायी विकृति, लीवर और किडनी पर दुष्प्रभाव तथा प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर के अंदर प्रवेश करने वाली किसी भी प्रक्रिया को केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
कानूनी दृष्टि से भी यह मामला बेहद गंभीर है। औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 की धारा 18 के तहत ऐसे कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक है जो नियमों का उल्लंघन करते हों। धारा 17सी “मिसब्रांडेड कॉस्मेटिक्स” से संबंधित है, जिसमें भ्रामक दावे, झूठे विज्ञापन और गलत लेबलिंग शामिल हैं। वहीं धारा 26ए केंद्र सरकार को जनहित में किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद के निर्माण, बिक्री या उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।
यदि कोई कॉस्मेटिक उत्पाद नकली, मिलावटी या गलत तरीके से उपयोग किया जाता है, तो दोषियों को अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद और भारी जुर्माना हो सकता है। वहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का इंजेक्शन के रूप में उपयोग करने पर एक वर्ष तक की कैद, 20 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि झूठे विज्ञापन, बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे और मेडिकल ट्रीटमेंट जैसा प्रभाव दिखाने वाले प्रचार भी कानून के दायरे में आएंगे।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने ब्यूटी इंडस्ट्री को नई रफ्तार दी है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर “पहले और बाद” की तस्वीरें दिखाकर लोगों को प्रभावित किया जाता है। युवा वर्ग और महिलाएं ऐसे विज्ञापनों से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। कई बार सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर्स भी ऐसे उत्पादों का प्रचार करते हैं, जिससे आम लोगों में विश्वास पैदा होता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों की वैज्ञानिक जांच बेहद सीमित होती है और कई उत्पादों में हानिकारक रसायन भी पाए जाते हैं।
सरकार ने जनता से अपील की है कि किसी भी ब्यूटी ट्रीटमेंट से पहले उसकी वैधता और चिकित्सकीय सुरक्षा की जांच अवश्य करें। यदि कहीं कॉस्मेटिक के नाम पर इंजेक्शन लगाए जा रहे हों या भ्रामक विज्ञापन चलाए जा रहे हों, तो इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को दें। प्रशासन का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जनता की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
स्पष्ट है कि सरकार की यह कार्रवाई केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संदेश है। आने वाले समय में ब्यूटी और एस्थेटिक इंडस्ट्री के लिए निगरानी और नियम और अधिक कठोर हो सकते हैं। अब यह समझना बेहद जरूरी है कि सुंदरता तभी सार्थक है जब वह स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ जुड़ी हो। त्वरित और सस्ते परिणामों की चाह में ऐसे उपचार अपनाना जो शरीर को नुकसान पहुंचाएं, गंभीर खतरे को आमंत्रण देने जैसा है। सीडीएससीओ की चेतावनी इसी दिशा में “सेफ्टी फर्स्ट” का मजबूत संदेश मानी जा रही है।

लेखक
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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