ऐतिहासिक बंदी में थमा गोरखपुर का दवा कारोबार, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट उत्तर प्रदेश के आह्वान पर दवा विक्रेता समिति गोरखपुर के नेतृत्व में जनपद के दवा व्यापारियों ने राष्ट्रव्यापी बंद को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक थोक और फुटकर दवा की सभी दुकानें बंद रहीं, जिससे बंदी का व्यापक असर देखने को मिला।

भालोटिया मार्केट, बेतियाहाता, गोरखनाथ, मोहद्दीपुर, गोलघर, दाउदपुर, नौशाद और शिव बाजार समेत शहर के प्रमुख इलाकों में दवा प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। वहीं बड़हलगंज, हाटा, कौड़ीराम, गगहा, बांसगांव, गोला, पीपीगंज, चौरी-चौरा, कैंपियरगंज, बेलघाट, सिकरीगंज और खजनी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंदी का व्यापक असर दिखाई दिया।

बंदी के दौरान हजारों दवा व्यापारी भालोटिया मार्केट में एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव को प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, अनियंत्रित होम डिलीवरी और कॉर्पोरेट मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र नाथ दूबे और महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त नियमन के बड़े स्तर पर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे नकली और गलत दवाओं की आपूर्ति बढ़ सकती है। साथ ही अत्यधिक छूट यानी डीप डिस्काउंटिंग को बाजार की पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए नुकसानदायक बताया।

व्यापारियों ने GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसी अधिसूचनाओं को निरस्त करने तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मनमानी पर नियंत्रण की मांग की। हालांकि जनहित को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी को बंदी से अलग रखा गया, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए थे।

दवा व्यापारियों के अनुसार इस बंदी से जनपद में लगभग 7 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ, लेकिन इसके बावजूद व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आंदोलन को सफल बनाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान “जनस्वास्थ्य बचाओ—दवा व्यापार बचाओ” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।

इस अवसर पर चेयरमैन अर्जुन अग्रवाल, संयोजक संतोष श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में दवा व्यापारी मौजूद रहे। समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन मरीजों के हित और सुरक्षित दवा व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

Karan Pandey

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