उप्र का नया मुख्य सचिव: 1989 बैच के एस.पी. गोयल बने नए मुख्य सचिव

लखनऊ,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आईएएस मनोज कुमार सिंह (1988 बैच) का कार्यकाल आज यानी 31 जुलाई 2025 को समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार से सेवा विस्तार न मिलने की स्थिति में उनके स्थान पर 1989 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी शशि प्रकाश (एस.पी.) गोयल को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है ।

📌 पृष्ठभूमि एवं अनुभव

गोयल राज्य सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े प्रमुख अधिकारी रहे हैं। मई 2017 से वे CM कार्यालय में अपर मुख्य सचिव (सरकार के अतिरिक्त चीफ़ सेक्रेटरी) के रूप में महत्वपूर्ण विभागों को देख रहे थे, जिसमें सिविल एविएशन, एस्टेट्स एवं प्रोटोकॉल आदि शामिल हैं ।

उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भरोसेमंद अफसर माना जाता है। उनकी शांति‑प्रिय और प्रोफ़ाइल‑न्यून शैली नौकरशाही में उन्हें प्रभावशाली बनाती है। “हर महत्वपूर्ण फाइल गोयल के पास से गुजरती है”, ऐसी चर्चा है ।

🔍 क्यों गोयल का नाम सबसे आगे रहा?

मनोज सिंह को एक साल सेवा विस्तार हेतु केंद्र से स्वीकृति नहीं मिलने की स्थिति में, गोयल प्रशासनिक अगुआई के लिए सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त नाम के रूप में सामने आए ।

गोयल के अलावा 1989 बैच के देवेश चतुर्वेदी और 1990 बैच के दीपक कुमार भी उम्मीदवारों में शामिल थे। किंतु गोयल सीनियर और CM ऑफिस में लंबे अनुभव के चलते सबसे आगे समझे गए ।

⚙️ प्रशासन में बदलाव का महत्व

मुख्य सचिव का पद राज्य में नीति निर्माण, कार्यान्वयन और विभागीय समन्वय का केंद्र माना जाता है। गोयल के आने से सूबे में प्रशासनिक स्थिरता, योजना‑प्रक्रियाओं में गति और मुख्यमंत्री की रणनीति की निरंतरता बनी रहेगी। आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अन्य योजनाओं के मद्देनजर भी प्रशासनिक निरंतरता अहम रही है ।

🗓️ अब क्या होगा?

मुख्यमंत्री कार्यालय ने केंद्र से मनोज सिंह के कार्यकाल में एक साल का विस्तार मांगा था, लेकिन केंद्र की ओर से इस पर अभी तक पुष्टि नहीं आई थी। यदि विस्तार न मिला होता, तो गोयल की नियुक्ति विकल्प सबसे उपयुक्त माना गया ।

शशि प्रकाश (एस.पी.) गोयल, 1989 बैच के आईएएस अधिकारी और मुख्यमंत्री के अत्यंत भरोसेमंद सहयोगी, अब उत्तर प्रदेश के नए मुख्य सचिव के रूप में पदभार संभाल ही चुके हैं। उनकी स्थिर शैली, प्रशासकीय अनुभव और मुख्यमंत्री के साथ निकटता उन्हें इस पद के लिए चुनौतियों का सामना करने में समर्थ बनाएगी। अब देखना है कि उनके नेतृत्व में यूपी की नौकरशाही किस तरह के विकासात्मक कदम उठाती है और आगामी चुनावी माहौल में प्रशासनिक संतुलन को कैसे बरकरार रखती है।


Editor CP pandey

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