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भक्ति में डूबा नागपुर, आधी रात तक झूमती रहीं हजारों श्रद्धालु आत्माएं


12 वर्षों बाद जीवनमुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के पावन मुख से सत्संग श्रवण कर भावविभोर हुए हजारों श्रद्धालु


हरे माधव सत्संग रूपी मानसरोवर में डुबकी लगाने उमड़ा आस्था का जनसैलाब


नागपुर/गोंदिया, भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव मानव कल्याण, सर्वधर्म समभाव और परमार्थ की जीवंत धारा रही है। इसी दिव्य परंपरा का अद्भुत स्वरूप 17 मई 2026 को नागपुर तथा 20 मई 2026 को जालना, महाराष्ट्र में आयोजित “हरे माधव सत्संग” में देखने को मिला, जहां 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जीवनमुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के पावन मुखारविंद से सत्संग श्रवण करने हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं की इतनी अधिक संख्या पहुंची कि विशाल मैदान और भव्य पंडाल भी छोटा पड़ गया। स्थिति यह रही कि आयोजकों को पंडाल की साइड बाउंड्री कवर खोलकर बाहर अतिरिक्त मेटिंग बिछाकर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था करनी पड़ी। दूर-दूर तक केवल श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम दृश्य दिखाई दे रहा था।
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो धरती पर किसी दिव्य लोक का अवतरण हो गया हो। वातावरण में भक्ति, प्रेम और सत्संग की ऐसी मधुर धारा प्रवाहित हो रही थी जिसे शब्दों में पूर्णतः व्यक्त कर पाना संभव नहीं है। हजारों भक्त सतगुरु प्रेम में तल्लीन होकर बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के श्रीदर्शन एवं अमृतमयी वचनों का लाभ प्राप्त कर रहे थे।
रात्रि 2 बजे तक श्रद्धालु सतगुरु भक्ति में भावविभोर होकर सद्गुणगान करते रहे। आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव वाले वर्तमान समय में भारतीय शाश्वत संस्कृति का यह विराट स्वरूप उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव कराने वाला रहा।
भक्तों ने भावुक होकर विनती की कि वर्ष में कम से कम दो बार “हरे माधव सत्संग” का आयोजन अवश्य कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस आध्यात्मिक अमृत का लाभ प्राप्त कर सकें।
हरे माधव परमार्थ पंथ के उन्नायक सद्गुरु बाबा ईश्वरशाह महाराज जी की भक्ति, प्रेम और परमार्थ की यह अलौकिक धारा आज भी लाखों लोगों के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रही है। नागपुर और जालना का यह दिव्य आयोजन श्रद्धा, आस्था और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के विराट स्वरूप का जीवंत उदाहरण बन गया।

✍️ लेखक : कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी), एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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