जनसेवा से बनाई अलग पहचान, रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन से शोक की लहर

बसपा के कद्दावर नेता और रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में अपूरणीय क्षति


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह का दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही रसड़ा विधानसभा क्षेत्र, बलिया जनपद और पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों समर्थकों ने उनके निधन को जनसेवा और पूर्वांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।
उमाशंकर सिंह बहुजन समाज पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह बसपा के एकमात्र विजयी विधायक बने और पार्टी के लिए एक विशेष राजनीतिक पहचान कायम की। इससे पहले वर्ष 2012 में रसड़ा विधानसभा सीट सामान्य घोषित होने के बाद उन्होंने बसपा प्रत्याशी के रूप में शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद लगातार तीन बार रसड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार बनाया।
अपने राजनीतिक जीवन के दौरान एक समय उन्हें दो लाभ के पद से जुड़े मामले में विधायकी गंवानी पड़ी थी, लेकिन बाद में कानूनी प्रक्रिया के उपरांत उनकी सदस्यता बहाल हो गई। इसके बावजूद क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बरकरार रही और उन्होंने जनसेवा का सिलसिला लगातार जारी रखा।
उमाशंकर सिंह केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज सेवा के कार्यों से भी उन्होंने अलग पहचान बनाई। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह का आयोजन कर पूरे प्रदेश का ध्यान आकर्षित किया। पहले 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया, जिसके बाद 351 जोड़ों का विवाह समारोह आयोजित कर सामाजिक सरोकार की नई मिसाल पेश की। उनके इन प्रयासों की प्रदेशभर में व्यापक सराहना हुई और हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला।
रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और आम लोगों के बीच सहज उपलब्ध रहने के कारण उमाशंकर सिंह की पहचान एक जनप्रिय विधायक के रूप में थी। उनके निधन की खबर सामने आते ही समर्थकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उमाशंकर सिंह के निधन से बसपा को बड़ी राजनीतिक क्षति हुई है। साथ ही पूर्वांचल की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने जनसेवा और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी अलग पहचान स्थापित की।

Editor CP pandey

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