तेहरान और कोम में रहस्यमयी तबाही: ‘अपरिचित दुश्मन’ के हमलों से दहला ईरान

तेहरान (RKP News Desk)तेहरान और कोम जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में सोमवार तड़के हुए भीषण हमलों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इन हमलों की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक किसी भी देश या संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। न तो इजराइल और न ही अमेरिका ने इस हमले से खुद को जोड़ा है, जिससे रहस्य और गहरा गया है।
हमलों की टाइमिंग भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही थी। इस चेतावनी के तुरंत बाद हुए हमलों ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है।
तेहरान में तड़के हुए हवाई हमलों में प्रतिष्ठित शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के आसपास स्थित इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही पास के एक प्राकृतिक गैस वितरण केंद्र पर भी असर पड़ा है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विश्वविद्यालय के भीतर किस विशेष हिस्से को निशाना बनाया गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान परिस्थितियों के चलते विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं चल रही थीं और परिसर लगभग खाली था। इस कारण संभावित जनहानि को कुछ हद तक टाला जा सका। यह विश्वविद्यालय लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रहा है, क्योंकि इसके ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। यह कार्यक्रम रिवोल्यूशनरी गार्ड के नियंत्रण में माना जाता है।
हमलों के दौरान पूरी रात तेहरान में धमाकों की गूंज सुनाई देती रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की आवाजें कई घंटों तक सुनाई देती रहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत थे।
वहीं दूसरी ओर, कोम में हुए हमलों ने और अधिक चिंता बढ़ा दी है। ईरान के सरकारी समाचार पत्र ‘ईरान’ के अनुसार, दक्षिण तेहरान के निकट स्थित कोम के एक रिहायशी इलाके में हुए हवाई हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस क्षेत्र में किस लक्ष्य को निशाना बनाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला पारंपरिक सैन्य रणनीति से अलग है। बिना जिम्मेदारी लिए इस तरह के सटीक हमले करना किसी अत्याधुनिक तकनीक या गुप्त ऑपरेशन की ओर इशारा करता है। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह साइबर और ड्रोन तकनीक के मिश्रण का परिणाम हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन शहरों को अब तक सुरक्षित माना जाता था, वहां इस तरह के हमले होना सुरक्षा तंत्र में संभावित खामियों की ओर संकेत करता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभिन्न देशों ने इस रहस्यमयी हमले पर चिंता व्यक्त की है और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, जब तक हमलावर की पहचान स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस घटना के पीछे की असली मंशा पर सवाल बने रहेंगे।
स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और ईरानी सुरक्षा बल लगातार जांच में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन फिलहाल यह घटना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आई है।

Editor CP pandey

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