पंजाब में बेअदबी कानून पर हलचल तेज, अमृतसर में SGPC की अहम बैठक आज


अमृतसर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी (Sacrilege) जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर पंजाब की राजनीति और पंथिक संगठनों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने 6 अप्रैल को अमृतसर स्थित अपने मुख्यालय में सभी प्रमुख सिख संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तावित नए बेअदबी विरोधी कानून पर विचार-विमर्श करना और एक साझा ‘पंथिक’ दृष्टिकोण तैयार करना है।
इस अहम बैठक में विभिन्न सिख संगठनों, धार्मिक नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे इस मुद्दे पर एक व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। बीते वर्षों में बेअदबी की घटनाओं ने पंजाब में सामाजिक और धार्मिक माहौल को कई बार प्रभावित किया है, ऐसे में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक से पहले SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह विषय केवल कानून का नहीं, बल्कि सिख समुदाय की आस्था और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे “बेहद संवेदनशील” बताते हुए कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पंथिक संगठनों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SGPC इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाने के पक्ष में है, ताकि सरकार के सामने मजबूत और स्पष्ट प्रस्ताव रखा जा सके।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि, इस पर विभिन्न संगठनों के बीच कुछ मतभेद भी सामने आए हैं, खासकर सजा की प्रकृति और उसके कानूनी स्वरूप को लेकर। इसी कारण SGPC सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर सामूहिक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पंजाब सरकार और सिख संगठनों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकती है। यदि इस बैठक में सहमति बनती है, तो इससे राज्य में कानून व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में बेअदबी की घटनाओं को लेकर पंजाब में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है और सरकारों पर सख्त कानून बनाने का दबाव बढ़ाया है। ऐसे में SGPC की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फिलहाल, सभी की निगाहें अमृतसर में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से बेअदबी कानून को लेकर आगे की रणनीति और रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सभी पंथिक संगठन एकजुट होकर कोई साझा प्रस्ताव तैयार कर पाते हैं या नहीं।

Editor CP pandey

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