रद्दा देखत रइहौंव तोर, गियां रे मंझनिया के पहाती।
आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।।
केंवची-केंवची पाना ल, खोंट के रखबे ओली भर के।
साध बुतावत ले खाबो, नून अउ मिरचा लाबे धर के।।
हंसी-ठिठोली करत रहिबो, पिरीत के बनके हम साथी।
आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।।
पक्का गुरतुर बोइर फरे हे, लबेदा मार-मार के गिराबो।
पार के राहेर पोठागे, टोरत-टोरत ददरिया गीत गाबो।।
तिवरा, चना अउ राहेर के बटकर खाए म मजा आही।
आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।।
सुकसा भाजी, बोइर खोइला के साग ह बिकट मिठाही।
गरमी के दिन म रांधबे अम्मटहा, गोरी तोर मन ल भाही।।
मया तोला करथौंव बही, मोर ले मिले बर हो ज राजी।
आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।।
कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़
वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)l मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक…
पंडित दीनदयाल प्रशिक्षण महाअभियान के समापन पर गरीब कल्याण योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर लगाए…
इंडोनेशिया,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सफ़ल त्रि-राष्ट्र यात्रा तथा ईरान -अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना…
बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) महावीरी झंडोत्सव के तहत शुक्रवार की रात सिकंदरपुर नगर में…