आरटीओ में बड़ा घोटाला: फर्जी दस्तावेजों पर जारी हुई 4 ट्रकों की आरसी, विजिलेंस जांच शुरू

शिमला (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आरटीओ शिमला कार्यालय में वाहनों के पंजीकरण में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। विजिलेंस ब्यूरो की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि चार ट्रकों को फर्जी दस्तावेजों और बिना भौतिक सत्यापन के आरसी (पंजीकरण प्रमाणपत्र) जारी किए गए। मामले में आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों, वाहन मालिकों और निजी कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस ने इस पूरे प्रकरण में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला क्या है?

जांच के अनुसार, ट्रक नंबर एचपी 63 डी 5642, एचपी 63 डी 5842, एचपी 63 एफ 2342 और एचपी 63 डी 3842 अशोक लीलैंड कंपनी की अंबाला एजेंसी से खरीदे गए थे। इन ट्रकों पर टैंकर फ्रेब्रिकेशन का काम साई फेब्रिकेशन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (हिसार) और सूर्या टैंक एंड एलाइड इंडस्ट्रीज (पठानकोट) ने किया था।

वाहन मालिकों का दावा था कि ट्रक शिमला भौतिक सत्यापन के लिए लाए गए थे और टोल टैक्स नकद में दिया गया था, लेकिन टोल रसीदें मौजूद नहीं हैं। विजिलेंस जांच में सामने आया कि 17 से 21 जुलाई 2025 के बीच सनवारा टोल बैरियर, परवाणू से कोई भी ट्रक नहीं गुजरा।

इससे साफ है कि वाहन शिमला लाए ही नहीं गए, फिर भी आरटीओ शिमला कार्यालय ने बिना सत्यापन के आरसी जारी कर दीं।

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फर्जीवाड़े के सबूत

जांच में यह भी सामने आया कि साई फेब्रिकेशन ने वाहन मालिकों के साथ मिलकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किया। ट्रकों की फैक्ट्री में आने की तारीख को अशोक लीलैंड अंबाला की ओर से जारी गेट पास से दो दिन पहले का दिखाया गया। इतना ही नहीं, फेब्रिकेशन यूनिट ने कोई गेट एंट्री/एग्जिट रजिस्टर भी नहीं रखा, फिर भी उन्होंने सटीक तारीखों वाले दस्तावेज जमा किए — जो जांच एजेंसी को बेहद संदिग्ध लगे।

शिकायत और कार्रवाई

इस घोटाले की शिकायत बलविंद्र सिंह निवासी डेराबस्सी (पंजाब) ने अप्रैल 2025 में विजिलेंस को दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरटीओ शिमला की ओर से कई सर्टिफिकेट और आरसी बिना सत्यापन के जारी की गईं।

विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि बलविंद्र सिंह की फर्म ने आईओसीएल (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड) के एक टेंडर के लिए आवेदन किया था, लेकिन टेंडर चारों ट्रकों के मालिकों को मिल गया था। शिकायत के बाद जब जांच हुई, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

विजिलेंस ने अब वाहन मालिक अनुपम चंडोक, उमंग चंडोक, साई फेब्रिकेशन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (हिसार) के अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता साबित होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Karan Pandey

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