मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)
हाल ही में कोंकण के मालवण राजकोट किले पर हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने की घटना घटित हुई है। इस कारण राजनीति गरमा गई है। राजनीतिक पार्टियों की ओर से जगह जगह धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रवादी
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नामदेव साबले से प्रतिक्रिया लिए जाने पर साबले ने कहा कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और उन्हें एक दूसरे पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है। हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक महाराष्ट्र के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज के पुतले का ढहना अति निंदनीय है इसकी जितनी भी निंदा की जाय कम है।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा…
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गोंदिया, महाराष्ट्र।“न विना परवादेन रमते दुर्जनोजन:। काक: सर्वरसान भुक्ते विनामध्यम न तृप्यति।।“अर्थात् दुष्ट व्यक्ति बिना…
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एलुमनी मीट में गूंजा मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा, वृद्धजनों के सम्मान पर बल गोरखपुर (राष्ट्र…