टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 26 फरवरी को होगा महा घेराव
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है। उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद जनपद महराजगंज में मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठन एक मंच पर आ गए हैं।
शिक्षकों ने 23 से 25 फरवरी तक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करने का ऐलान किया है। इसी क्रम में घुघली ब्लॉक स्थित बीआरसी पर चल रहे शारदा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर प्रशिक्षण लिया और विरोध दर्ज कराया।
क्या है विवाद की जड़?
विवाद 1 सितंबर 2025 को जारी उस आदेश को लेकर है, जिसमें पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था, इसलिए इस तिथि के बाद नियुक्त शिक्षकों पर ही टीईटी लागू होना चाहिए।
ये भी पढ़े – महराजगंज में “ऑपरेशन कार-ओ-बार” की सख्ती, नशे में ड्राइविंग पर कार्रवाई
शिक्षक नेता का बयान
शिक्षक नेता मनोज वर्मा ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक टीईटी की अनिवार्यता थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने इसे शिक्षकों के आत्मसम्मान और सेवा सुरक्षा पर चोट बताया।
26 फरवरी को महा घेराव
शिक्षक संगठनों ने 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन और घेराव का ऐलान किया है। आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा और आदेश में संशोधन तक विरोध जारी रहेगा।
जनपद महराजगंज में यह मुद्दा अब केवल परीक्षा की अनिवार्यता तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बनता जा रहा है।
Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/2021/05/blog-post.html?m=1#google_vignette
सुबह 7 बजे से रात 7 बजे तक ही खुले रहेंगे पेट्रोल पंप, तय मात्रा…
कांग्रेसियों ने तपती धूप में नगर के डाकबंगला से तहसील कार्यालय तक प्रदर्शन कर की…
नपाध्यक्ष ने झंडी दिखाकर बस को किया रवाना बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पद्मिनी एकादशी के उपलक्ष्य में…
स्वास्थ्य, बिजली, सड़क और किसानों की समस्याओं के समाधान की उठाई मांग सिकन्दरपुर (राष्ट्र की…
-डॉ. सत्यवान सौरभ पोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास।…
प्रथम जनपद आगमन पर गाजे-बाजे के साथ हुआ अभिनंदन बरहज (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रवादी जन…