अनुचित स्पर्धा की चाहत भी
लोगों की नक़ल कराती है,
औरों की कृतियाँ, अंदाज,
तरीक़ा भी औरों का अपनाती है।
अपना कहने की चाहत में
औरों का संगीत चुराकर भी,
अपना गीत, कला अपनी
अपनी ही धुन है बतलाती है।
पर यदि जुनून हो दृढ़ता से,
मज़बूत पकड़ अपनी होती,
नक़ल न कोई कर पाता है,
अपने गीत कला अपनी होती।
नकारात्मक होकर कोई
नहीं सफलता पा सकता है,
जितना दूरी होगी इस दुर्गुण
से उतना सुख कोई पाता है।
ज्ञान प्राप्ति से भी बेहतर उसका
विज्ञान समझना होता है,
जितना उत्तम विश्लेषण होगा
विज्ञान भी उतना उत्तम होता है।
मित्र बहुत ऐसे होंगे अपने,
जो हमें जानते तो होंगे,
आदित्य बहुत कम ही होंगे,
जो हमें समझते भी होंगे।
डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’
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