Saturday, April 18, 2026
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा जौनपुर: वार्षिक महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

जौनपुर में शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम: कैलाश नाथ सिंह शिक्षण संस्थान का वार्षिक महोत्सव भव्यता के साथ सम्पन्न


जौनपुर (राष्ट्र की परम्परा) जौनपुर जनपद के गोधना स्थित कैलाश नाथ सिंह शिक्षण संस्थान में आयोजित वार्षिक महोत्सव ने शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक समृद्धि से ओतप्रोत रहा, जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में कृपाशंकर सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया। उनके साथ कई विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहे, जिनमें उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता ओमप्रकाश सिंह, वीरेंद्र सिंह, एडवोकेट श्यामराज सिंह, रत्नाकर सिंह, अजीत सिंह, वंशलोचन सिंह और डॉ. राजीव सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य, संगीत, नाटक और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों का मन मोह लिया बल्कि तालियों की गूंज से पूरा परिसर उत्सवमय हो उठा।

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आयोजन समिति के प्रमुख छत्रधारी सिंह, मनोज कुमार सिंह, प्रदीप सिंह एवं रूपम सिंह ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। अतिथियों ने विद्यालय के अनुशासन, आधुनिक संरचना और विद्यार्थियों की प्रतिभा की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों का जो समावेश कर रहा है, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है।
मुख्य अतिथि कृपाशंकर सिंह ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति के जीवन को दिशा देती है और समाज को नई ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और निरंतर परिश्रम करने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों और अभिभावकों को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने विद्यालय परिवार को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी और संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह महोत्सव न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि शिक्षा और संस्कारों के संतुलित विकास का प्रेरक उदाहरण भी बना।

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