धन दौलत से सुविधायें तो मिलती हैं
सुख मिलता है अपनों के प्यार से,
सुविधाओं से सुःख मिलता तो किसी
को दुःख क्यों मिलता इस संसार से।
रिश्ते वही कामयाब होते हैं जो
सभी तरफ से निभाये जाते हैं,
केवल एक तरफ़ सेंकने से तो
कोई रोटी भी नहीं बना पाते हैं।
दिल से अच्छे होना तब बेहतर है,
जब हम जुबान से भी अच्छे होते हैं,
स्वाद जुबान को ही मिलता है, दिल
तक तो खास लोग ही पहुंच पाते हैं ।
अपनी गलती का एहसास होने से
ज़्यादातर विनम्रता आ जाती है,
सफलता मिलना अच्छा है पर ऐसी
स्थिति हमारा अहंकार बढ़ा जाती है।
जहाँ हम मिले ज्ञान से शब्दों की
सुंदरता व सार्थकता समझ पाते हैं,
वहीं उसके एहसास और अनुभव
से शब्दों के भावार्थ समझ आते हैं ।
आदित्य अध्ययन, पठन, पाठन की
निरंतरता ज्ञान की अनुभूति कराती है,
जहाँ ज्ञान व सफलता सुंदर पुष्प हैं,
विनम्रता उनके एहसास की ख़ुशबू है।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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