लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रदेश के दर्जनभर निजी मेडिकल कॉलेजों ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की फीस में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब छात्रों को प्रति वर्ष डेढ़ लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक ज्यादा फीस चुकानी पड़ेगी। फीस में इस इज़ाफे के बाद अब एमबीबीएस की वार्षिक फीस 12 लाख रुपये से बढ़कर 19 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जिन निजी मेडिकल कॉलेजों ने फीस बढ़ाई है, वे प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में शामिल हैं। कुछ कॉलेजों में जहां पहले वार्षिक फीस 11.5 लाख से 13 लाख रुपये के बीच थी, वहीं अब यह 14 लाख से 17 लाख रुपये तक हो गई है। वहीं कुछ कॉलेजों में यह राशि सीधे 18 से 19 लाख रुपये तक कर दी गई है।
फीस वृद्धि को लेकर छात्रों और अभिभावकों में रोष है। अभिभावकों का कहना है कि पहले से ही निजी कॉलेजों की फीस आम आदमी की पहुंच से बाहर थी, अब यह फैसला और अधिक बोझ बढ़ाने वाला साबित होगा। वहीं, कई मेडिकल छात्र संगठनों ने इस वृद्धि के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटों और कड़े प्रतिस्पर्धा के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी कॉलेजों का रुख करते हैं। लेकिन अब फीस वृद्धि के बाद आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय छात्रों के लिए डॉक्टर बनने का सपना और कठिन हो गया है।
फीस बढ़ोतरी का अनुमानित आंकड़ा (प्रति वर्ष): न्यूनतम बढ़ोतरी: ₹1.5 लाख,अधिकतम बढ़ोतरी: ₹5 लाख
नई फीस सीमा: ₹12 लाख से ₹19 लाख प्रति वर्ष
प्रबंधन की दलील
निजी कॉलेजों का कहना है कि बढ़ती लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और शिक्षकों के वेतन में वृद्धि के चलते फीस बढ़ाना जरूरी हो गया था। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर चिकित्सा शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है।
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