गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University के हिंदी विभाग में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन ने पीढ़ियों के बीच संवाद, स्मृतियों और अनुभवों के आदान-प्रदान की एक प्रेरक मिसाल पेश की। इस आयोजन में दशकों पुराने विद्यार्थियों से लेकर वर्तमान सत्र के छात्र-छात्राओं तक ने भाग लेकर इसे विशेष बना दिया।
कुलपति ने संवाद और समन्वय पर दिया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति Prof. Poonam Tandon ने कहा कि हिंदी विभाग की समृद्ध परंपरा रही है और यहां के पुरातन छात्रों ने समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि:
• पुरातन छात्रों के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है
• इससे वर्तमान पीढ़ी को मार्गदर्शन मिलता है
• शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुभवों से भी विकसित होती है
उन्होंने यह भी कहा कि सम्मान और प्रोत्साहन किसी भी स्वस्थ समाज की पहचान होते हैं और ऐसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्मृतियों का महत्व: पद्मश्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
इस अवसर पर Vishwanath Prasad Tiwari ने स्मृतियों के महत्व पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि:
“जीवन का मूल आधार स्मृति है। यदि स्मृतियां समाप्त हो जाएं, तो मनुष्य का अस्तित्व भी निरर्थक हो जाता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि मानव मस्तिष्क की प्रवृत्ति होती है कि वह बुरी स्मृतियों को अधिक याद रखता है और अच्छी स्मृतियों को भूल जाता है। इस प्रवृत्ति से ऊपर उठना ही जीवन को सही दिशा देता है।
पुरातन छात्रों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में कई पुरातन छात्रों और शिक्षकों ने अपने अनुभव और यादें साझा कीं, जिनमें प्रमुख रूप से:
• प्रो. अनंत मिश्र
• रामदरश राय
• अरविंद त्रिपाठी
• अनिल राय
• रंजना जायसवाल
• प्रभा सिंह
इन सभी ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित किया।
आयोजन की विशेषताएं
• 1957 बैच से लेकर वर्तमान सत्र तक के छात्रों की भागीदारी
• पीढ़ियों के बीच जीवंत संवाद
• शिक्षा, साहित्य और जीवन मूल्यों पर चर्चा
• अनुभव और मार्गदर्शन का आदान-प्रदान
हिंदी विभाग के अध्यक्ष Vimlesh Kumar Mishra ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन Rajesh Mall ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन Sunil Yadav ने दिया।
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