गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में द्वितीय व्यावसायिक बीएएमएस के विद्यार्थियों के अभिमुखीकरण सप्ताह के अंतर्गत “व्यक्तित्व विकास” विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. रघु राम आचार, डीन (IQAC एवं छात्र कल्याण) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रथम वर्ष की आधारभूत शिक्षा से क्लिनिकल अध्ययन की ओर संक्रमण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग, नैदानिक सोच तथा रोगी-केन्द्रित दृष्टिकोण के विकास पर बल देते हुए आयुर्वेद के सिद्धांत—शरीर, मन एवं सत्व—को एक संवेदनशील एवं नैतिक चिकित्सक की आधारशिला बताया। व्याख्यान के दौरान चिकित्सक-रोगी संवाद, व्यावसायिक नैतिकता, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन, तनाव प्रबंधन, टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, डिजिटल आचरण तथा आजीवन अधिगम जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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डॉ. आचार ने विद्यार्थियों को दैनिक क्लिनिकल जर्नल लेखन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अपने अनुभवों, अवलोकनों और सीख को नियमित रूप से दर्ज करना भविष्य में केस स्टडी, शोध एवं पेशेवर विकास के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। उन्होंने सहानुभूति, स्पष्ट संवाद और अनुशासन को चिकित्सा क्षेत्र में सफलता का मूल मंत्र बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. गिरिधर वेदांतम, प्राचार्य एवं डीन, जीजीआईएमएस द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने अभिमुखीकरण कार्यक्रमों की महत्ता पर प्रकाश डाला। अंत में डॉ. अर्पित वालिया, सहायक आचार्य, अगद तंत्र ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए व्याख्यान की उपयोगिता को रेखांकित किया।
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