रामकथा से समाज में कैसे जागृत होती है भक्ति और संस्कार चेतना

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।श्रीराम को पाने के लिए मनु और शतरूपा को तेईस हजार वर्षों तक कठोर तपस्या करनी पड़ी, तब जाकर भगवान श्रीनारायण ने राम रूप में धरती पर अवतार लिया। यह मार्मिक और गूढ़ प्रसंग मानस के प्रकांड विद्वान किशोरी शरण जी महाराज ने मऊ नगर की सिंधी कॉलोनी स्थित श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव एवं श्रीराम कथा के दौरान भक्तों के समक्ष रखा। श्रीराम जन्म के पावन अवसर पर उनकी वाणी से निकली कथाओं ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

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किशोरी शरण जी महाराज ने कहा कि मनु-शतरूपा की दीर्घ तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्रीनारायण ने यह वरदान दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। इसी क्रम में अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के घर भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। केवल देवता ही नहीं, बल्कि बंदर, भालू और समस्त देवी-देवता भी विभिन्न रूपों में इस लीला में सहभागी बने। यह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो उठे और पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
श्रीराम लला के प्रकट होते ही मंदिर परिसर “भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी” भजन से गूंज उठा। भक्तजन झूमते-नाचते हुए राम जन्मोत्सव की बधाइयां देने लगे। वृद्ध, युवा और युवतियां सभी सुध-बुध खोकर भाव-विह्वल हो उठे। व्यास पीठ से बधाई और पारंपरिक सोहर गीतों की प्रस्तुति हुई, जिस पर श्रद्धालुओं ने खुले मन से धन न्योछावर किया।

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कार्यक्रम के दौरान मंदिर के पुजारी नागराज रामाशीष चौबे, कमल कुमार और छवि श्याम शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत और अभिनंदन किया। आरती में आर.के. सिंह, अरुण कुमार, पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. रामगोपाल गुप्त, कपिल खंडेलवाल, राजकुमार खंडेलवाल, वीरू बाबू सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे। इसके अतिरिक्त कैलाश चंद जायसवाल, चंद्रशेखर अग्रवाल ‘चंदू’, अमित शर्मा, विनोद गुप्ता, मनीष मद्धेशिया, आनंद गुप्ता, बब्बन सिंह, अनिल शर्मा, धनेश कुमार, शिवधर यादव समेत बड़ी संख्या में भक्तों ने श्रीराम कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर का यह वार्षिकोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि रामभक्ति, संस्कार और भारतीय परंपरा को सुदृढ़ करने वाला आयोजन भी सिद्ध हुआ।

Editor CP pandey

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