चुनाव टिकट: साक्षात्कार

चुनाव के टिकट पाने के लिए एक
नेता पुत्र का साक्षात्कार हो रहा था,
उनसे जब पूछा गया, तुम कौन हो,
उसने कहा सर्वशक्तिमान नेता पुत्र।

दूसरा प्रश्न तुम्हारे जीवन का उद्देश्य,
उत्तर दे वो बोला, येन केन प्रकारेण
दौलत, सुख, समृद्धि व अपार शक्ति
अर्जित कर के बाहुबली बन जाना।

आपके जन्मने का क्या कारण है,
जन्म लेकर धरती पर राज्य करना,
आप जन्म मरण से मुक्त कैसे होगे,
जोड़ तोड़ करके सत्ता हासिल करके।

जीते जी अपनी मूर्ति लगवा लूँगा,
फिर मरने के बाद भी अमर रहूँगा,
अगला यक्ष प्रश्न कि ईश्वर कौन है,
वह जो सत्ता तक पहुँचाये, कुर्सी दे।

और संसार में दुःखी कौन होता है,
वह जो सत्ता व कुर्सी से दूर होता है,
और भाग्य किसे कहते हैं, जिताऊ
पार्टी का नेता और फिर मंत्री बनना।

जीवन में सच्चा प्रेम कहाँ मिलता है,
सीधी सी बात है सत्ता की कुर्सी पर,
दुर्भाग्य का सबसे बड़ा कारण क्या,
हाई कमान की कृपा से वंचित रहना।

धरती से ज़्यादा वजनदार क्या है,
मलाईदार कुर्सी व रिश्वत का माल,
तो हवा से भी तेज क्या है, अफ़वाह,
सबसे धीमी चाल, सरकारी फ़ाइल।

सबसे ज़्यादा ऊँचाई किसकी होती है
सिफ़ारिश और उससे मिली नौकरी,
तिनके से भी हल्का क्या होता है,
चुनाव के बाद मतदाता और जनता।

तो राजनीति में त्यागने वाली चीज़
क्या है ? शर्म अर्थात् बेशर्म होना,
सबसे आश्चर्य? फ़ाइल पर वजन
बढ़वाकर भी काम पूरा न करना।

कभी जेल गये हो, हाँ एक बार,
किस जुर्म में, स्कूटर में तीन लोग
घूमने जा रहे थे, सिपाही ने रोका,
हमने सिपाही की पिटाई कर दी।

आपको टिकट क्यों दिया जाय,
क्योंकि मैं समाजसेवा करूँगा,
अभी क्या कर रहे हो, समाजसेवा,
तो करते रहो टिकट क्या करोगे ?

टिकट पाकर चुनाव लड़ूँगा और
चुनाव जीतकर एम एल ए बनूँगा,
मंत्री बनूँगा, समाजसेवा करूँगा,
वो तो अभी भी कर रहे हो भाई।

अब आख़िरी प्रश्न कि राजनीति में
कौन सगा और अपना कौन होता है,
बहुत ही लाजवाब उत्तर कि राजनीति
में कोई सगा या अपना नहीं होता है।

पत्नी के ख़िलाफ़ स्वयं पतिदेव,
पिता के ख़िलाफ़ पुत्र, पुत्री और
भाई के ख़िलाफ़ भाई, और माँ के
ख़िलाफ़ आदित्य बेटा भी होता है।

हाँ, यह बात अलग है कि हमसब
अंदर खाने एक भी हो सकते हैं,
और राजनीति में तो कोई किसी का
न मित्र और न स्थायी शत्रु होता है।

विद्यावाचस्पति डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpNavneet Mishra

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